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खुला लिफाफा, 12 शिक्षकों की हुई तैनाती

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लिफाफा खुला, 12 शिक्षकों की हुई नियुक्ति
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में हिंदी एवं बायोटेक्नालॉजी विभाग में शिक्षकों की भर्ती के लिए लिफाफा खोला गया। कुछ सदस्यों ने इसपर आपत्ति जताते हुए 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली को लागू कर नए सिरे से नियुक्ति की मांग की। हालांकि नियुक्ति के पक्ष में ज्यादा सदस्यों के होने के चलते विरोध का यह स्वर धीमा पड़ गया। इसके बाद कार्यपरिषद ने दोनों विभागों में 12 शिक्षकों की नियुक्ति पर मोहर लगा दी। इसमें चार प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर तथा सात असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं।
कुलपति प्रो वीके सिंह की मौजूदगी में दोपहर 12 बजे कार्यपरिषद की बैठक शुरू हुई। कुलपति ने सदस्यों को कुलाधिपति के निर्देश से अवगत कराया। कुछ सदस्यों ने लिफाफा खोलने का प्रस्ताव किया तो पूर्व कुलपति प्रो. रामअचल सिंह ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उनके पक्ष में दो और शिक्षकों ने भी आरक्षण नियमों का हवाला दिया। इसी बीच कई सदस्य लिफाफा खोलने के पक्ष में तर्क देने लगे। इससे कुछ समय के लिए माहौल हंगामेदार हो गया। इसकी वजह से निर्णय लेने में एक घंटे ज्यादा समय लग गया। लिफाफा खोलने के पक्ष में ज्यादा संख्या होने पर कुलपति ने इसकी अनुमति दे दी। कुलसचिव ने चयनित शिक्षकों का नाम पढ़कर सुनाया।
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विरोध में कुछ शिक्षकों ने छोड़ी बैठक!
चर्चा रही कि नियुक्ति प्रकिया पर सवाल उठाने वाले कुछ शिक्षक बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए। उधर, बैठक के बाहर समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ता और कई छात्रनेता भी मौजूद रहे, लेकिन पुलिस की तैनाती के चलते किसी ने हंगामा नहीं किया। चयनित एक शिक्षक के समर्थकों की ओर से लोगों को मिठाई भी खिलाई गई।
इनकी हुई तैनाती
हिंदी विभाग
प्रोफेसर : अरविंद त्रिपाठी, राजेश कुमार मल्ल, प्रत्यूष दुबे (सभी सामान्य)
एसोसिएट प्रोफेसर : डॉ दमयंती तिवारी (सामान्य)
असिस्टेंट प्रोफेसर : अखिल मिश्रा, अभिषेक शुक्ला (सामान्य), संदीप कुमार यादव, सुनील कुमार (ओबीसी), नरेंद्र कुमार, रामनरेश राम (एससी)
बायोटेक्नालॉली
प्रोफेसर : राजर्षि कुमार गौर (सामान्य)
एसोसिएट प्रोफेसर : फारूख अकील (सामान्य)
दो साल ही पढ़ा सकेंगे दो शिक्षक
गोरखपुर। हिंदी विभाग में दो ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो अधिकतम दो साल तक ही पढ़ा सकेंगे। एक प्रोफेसर तो सरकारी विभाग से प्रशासनिक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि चयनित एक महिला शिक्षक के पति विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं। परिसर में इन नियुक्तियों की भी खूब चर्चा है।
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दो दिन पहले ही सार्वजनिक हुई थी सूची
गोरखपुर। कार्यपरिषद की बैठक में लिफाफे से चयनित जो नाम सामने आए, उसकी सूची दो दिन पहले से ही सार्वजनिक हो चुकी थी। व्हाट्स ग्रुप पर बकायदा इनके चयन का दावा किया जा रहा था। ये दावे सच भी साबित हुए। ऐसे में चयन की गोपनीयता पर भी सवाल उठने लगा है।
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