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माता-पिता को नहीं आई नवजात पर दया, स्टेशन पर लावारिस छोड़ा

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रेलवे स्टेशन पर लावारिश मिला नवजात।
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माता-पिता को नहीं आई नवजात पर दया, स्टेशन पर लावारिस छोड़ा
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गोरखपुर। सप्ताह भर पहले जन्मे जिस नवजात को जब मां के गोद की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस वक्त वह गुरुवार को गोरखपुर जंक्शन की फर्श पर लावारिस पड़ा था। उस दुधमुंहे को किसी ने शाल में लपेटकर छोड़ दिया। जब बच्चे का रुदन गूंजा तो वहां मौजूद मुसाफिरों की नजर उस पर पड़ी। बच्चे को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया। नवजात पूरी तरह से स्वस्थ है, मगर मेडिकल जांच में उसकी दोनों आंखें की रोशनी गायब मिली। नवजात को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है।
जानकारी के मुताबिक गुरुवार की शाम करीब साढ़े सात बजे जनरल टिकट काउंटर के पास एक कोने में बच्चे के रोने की आवाज आई। भीड़ में खड़े कुछ मुसाफिरों ने जाकर देखा तो शाल में लपेटा एक बच्चा वहां पड़ा था। कुछ महिलाएं भी आ गईं और उनकी ममता उमड़ पड़ी। एक महिला गोद में लेकर बच्चे को चुप कराने की कोशिश करने लगी। दो लोगों ने बच्चे को अपनाने की इच्छा भी जताई। सूचना पाकर यात्री मित्र कार्यालय से डिप्टी एसएस कामर्शियल और आरपीएफ के जवान भी पहुंच गए। चाइल्ड लाइन को फोन कर सूचना दी गई। वहां से आए लोग लिखापढ़ी के बाद बच्चे को साथ ले गए। बच्चे को अपनाने की इच्छा जताने वालों को तत्काल बच्चे को देने से मना कर दिया गया। बताया गया कि कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद ही वे उसे अपने साथ रख सकते हैं। शुक्रवार को बच्चे को बाल कल्याण समिति (सीडब्लूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सीडब्लूसी के निर्देश पर बच्चे की मेडिकल जांच कराई गई तो उसकी दोनों आंखें खराब मिलीं। चाइल्ड लाइन के केंद्रीय समन्वयक के. मैथ्यू ने बताया कि बच्चे को जंगल एकला स्थित बाल संरक्षण गृह में रखा गया है।
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सीसीटीवी फुटेज में नहीं दिखा बच्चे को रखने वाला
जनरल टिकट काउंटर के पास सीसीटीवी कैमरा लगा है। लेकिन, वहां निर्माण कार्य की वजह से बच्चे को छोड़कर जाने वाले की तस्वीर कैद नहीं हो पाई। आरपीएफ इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य के कारण मौके पर लगा एक सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था।
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