गोरखपुर: प्रदूषण से 30 साल में 50 हजार लोगों की मौत
गोरखपुर। पिछले 30 वर्षों में प्रदूषण की वजह से गोरखपुर में करीब 50 हजार लोग काल के गाल में समा चुके हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) हाईपावर कमेटी ने एनजीटी के सामने पेश रिपोर्ट में प्रदूषण के चलते मौत का यह भयावह आंकड़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक रामगढ़ ताल के अलावा आमी, राप्ती और रोहिन नदी जैसे जल स्रोत, नालों के दूषित पानी और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से जहरीले हो गए हैं। सिर्फ सन 2012 में ही प्रदूषण के चलते 557 लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके 30 साल के दौरान किसी भी सरकारी विभाग ने प्रदूषण रोकने के लिए अपना काम जिम्मेदारीपूर्वक नहीं निभाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम की ओर से ठोस अपशिष्ट (कूड़ा कचरा) का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया। बिना शोधन किए रामगढ़ ताल में शहर को दूषित पानी डाला गया। राप्ती नदी में भी शहर का गंदा पानी अब भी बिना शोधन के डाला जा रहा है। गीडा की फैक्ट्रियों से निकले दूषित पानी से आमी नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। इन दोनों नदियों के गंदा होने की वजह से यह घाघरा से मिलने के बाद गंगा नदी को प्रदूषित कर रही है। नगर निगम की ओर से कूड़ा कचरा कचरा खुले में फेंका जा रहा है।
लैंडफील्ड में भी वैज्ञानिक तरीके से कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा है। इन सब वजहों से गोरखपुर की न सिर्फ आबोहवा खराब हुई है, बल्कि पानी भी प्रदूषित हुआ है। इससे पिछले 30 साल के दौरान 50 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। एनजीटी ने शहर के सभी लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का आदेश दिया है। साथ ही जो भी इससे पीड़ित हुए हैं, उनके पुनर्वास के लिए योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में 27 सितंबर को मीरा शुक्ला बनाम नगर निगम गोरखपुर के मामले पर सुनवाई के दौरान हाईपावर कमेटी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पेश की गई थी। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार ओझा की अध्यक्षता में, न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी, न्यायमूर्ति रामाकृष्णन और विशेषज्ञ नागिन नंदा ने मामले की सुनवाई की। एनजीटी ने हमारी सारी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।
राजेंद्र सिंह, सचिव, हाईपावर कमेटी
उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया मुआवजा वसूलने का निर्देश
पर्यावरण को क्षति पहुंचाने की वजह से बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज पर तय जुर्माना को वसूलने की जिम्मेदारी एनजीटी ने उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी। वहीं गीडा के भारती रिसर्च एंड ब्रीडिंग फर्म, मदर श्री डेयरी, अल्केन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, बर्नेत फार्मास्यूटिकल प्राइवेट लिमिटेड, गोरखनाथ एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, रॉयल सवेरा फुड्स प्राइवेट लिमिटेड, संधू हेचरी प्राइवेट लिमिटेड पर लगाए गए जुर्माने के वसूलने के साथ भूगर्भ जल के गलत ढंग से इस्तेमाल करने पर भी जुर्माना वसूलने को कहा है।