अंडमान के काले मोती प्रोजेक्ट पर अंडमान की नौकरशाही का कहर
संतोष सिंह
गोरखपुर। दुनिया के जाने-माने पर्ल-एक्वाकल्चर साइंटिस्ट डॉ. अजय कुमार सोनकर जिनके काम को पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम ने सराहा, वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविद भी जिनकी योग्यता के हामी हैं, उनके प्रोजेक्ट को अंडमान निकोबार द्वीप समूह की नौकरशाही ने तबाह कर दिया। अंडमान के नार्थ-बे इलाके में रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए समुद्र किनारे आवंटित जमीन को हड़पने के लिए 18 साल की जी तोड़ मेहनत से तैयार प्रोजेक्ट को ध्वस्त कर समुद्र की अतुल गहराईयों में डुबो दिया गया। यह वही प्रोजेक्ट है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा काला मोती तैयार हुआ था।
अंडमान की पहचान जिस प्रोजेक्ट के चलते दुनिया के नक्शे पर काले मोती की उर्वरा धरती के रूप में बन रही थी, उसके रैफ्ट को एक ही रात में ध्वस्त कर दिया गया, आयस्टर केज के अंदर पल रहे 74 हजार आयस्टर ( सीप) की हत्या कर उन्हें जलसमाधि दे दी गई। इस सबके पीछे प्रत्यक्ष तौर पर द्वीप की नौकरशाही का चेहरा दिखाई दिया, पर्दे के पीछे से किसके लिए यह खेल खेला गया, अब तक पता नहीं चल सका। भला हो कोलकाता हाईकोर्ट का जिसने बेदखली आदेश पर रोक लगा दी। पर्ल कल्चर और एक्वाकल्चर की दुनिया के जाने-माने साइंटिस्ट डॉ. अजय कुमार सोनकर पर इस क्षेत्र में शोध करने के लिए देश-दुनिया के तमाम सरकारी-गैरसरकारी संगठन निर्भर करते हैं। इलाहाबाद के रहने वाले, डॉ. सोनकर बुधवार को गोरखपुर एक निजी कार्यक्रम में आए थे। होटल क्लार्क्स ग्रैंड में ठहरे डॉ. अजय ने अमर उजाला संवाददाता से विशेष बातचीत की और बताया कि पिछले दिनों अंडमान निकोबार द्वीप समूह की नौकरशाही ने उनसे अपराधी जैसा सलूक किया है। प्रोजेक्ट की जमीन जबरन अधिग्रहीत कर ली गई। कुछ बोलने तक नहीं दिया गया। घर पर पुलिस आई। रिसर्च लैब तक सील कर दिया गया। मैं हैरत में हूं कि यह मोदी का देश है, जहां मेक इंडिया पर जोर है। स्टार्टअप की बहार है। जो खुद वैज्ञानिकों को प्रमोट करने में रात-दिन एक किए हुए हैं। उनके देश में अंडमान प्रशासन ने यह अराजकता मचा रखी है। मुझे अब तक नहीं पता चल सका कि किसके इशारे पर यह आपराधिक साजिश की गई। मेरा जीना हराम कर दिया। केवल इसलिए कि मैं, देश में रहना चाहता हूं। देश के लिए कुछ करना चाहता हूं। यह सब क्यों और कैसे हुआ यह जानने के लिए अभिषेक देव, डीसी अंडमान साउथ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी जल्दी पोस्टिंग हुई है। उन्होंने मामले पर कुछ कहने के इंकार कर दिया।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी कर चुके सराहना
पर्ल कल्चर साइंटिस्ट डॉ. अजय की मेधा को देश, दुनिया में बड़ा सम्मान है। प्रसिद्ध साइंटिस्ट व पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने पीठ थपथपाई थी। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत में रहकर ही काम करें। बाहर जाने की जरूरत नहीं है। ब्रेन ड्रेन से देश का नुकसान होता है। युवा आपको और आपके काम को देखेंगे। प्रेरित होकर पर्ल कल्चर के क्षेत्र में आएंगे। पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायन ने भी डॉ. अजय के काम को सराहा था।
घटनाक्रम का गोरखपुर से जुड़ाव
साइंटिस्ट के साथ घटनाक्रम का जुड़ाव गोरखपुर से भी है। जिस वक्त साइंटिस्ट की प्रापर्टी सील की गई, उस वक्त अंडमान साउथ के डीसी उदित प्रकाश रे थे। उदित गोरखपुर के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई लिखाई गोरखपुर विश्वविद्यालय से हुई है। हाल ही उदित पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। कार्रवाई भी हुई है। आखिर यह सब उन्होंने किसके इशारे पर और क्यों किया यह जानने के लिए उनके मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन बंद मिला। उनका पक्ष जब भी आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
कोलकाता हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
साइंटिस्ट की प्रापर्टी अधिग्रहीत करने पर कोलकाता हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने शासन की तरफ से जारी अधिग्रहण आदेश पर हमेशा के लिए रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 1993 से ही पर्ल कल्चर से जुड़े हैं। केंद्र सरकार की कई संस्थाएं उनके साथ समझौता करके काम करना चाहती हैं। जमीन से बेदखली के मामले में किसी तरह के नियम का पालन नहीं किया गया।नैषर्गिंक न्याय के सिद्धांतों को उल्लघन किया गया। किसी की प्रापर्टी जबरन नहीं ली जा सकती है। पूरी प्रक्रिया गलत है, इसलिए अधिग्रहण आदेश पर हमेशा के लिए रोक लगाई जाती है। डॉ. सोनकर को आगे की कार्रवाई के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर को प्रत्यावेदन देने के लिए ताकीद किया गया। वह प्रक्रिया जारी है।
13 दिन में ही सब कुछ बदला
::: डॉ. अजय सोनकर 2001 से ही अंडमान में काम कर रहे हैं लेकिन 13 दिन में ही सब कुछ बदल गया। 20 जून को साइंटिस्ट के घर व रिसर्च लैब पर कारण बताओ नोटिस चस्पा किया गया। साथ ही 24 जून 2019 को जवाब मांग लिया। साइंटिस्ट अंडमान साउथ के डीसी के दफ्तर गए तो उन्हें देरशाम तक बैठाकर रखा गया। 25 जून अंडमान साउथ में फैली साइंटिस्ट की पांच एकड़ प्रापर्टी पर प्रशासन ने कब्जा कर लिया। रिसर्च लैब सहित तमाम दफ्तर सील कर दिए। यह मामला तीन जुलाई को कोलकाता हाईकोर्ट पहुंचा और मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने साइंटिस्ट के पक्ष में स्थगनादेश देकर प्रशासन की साजिश को बैकफुट पर ला दिया।
लेफ्टिनेंट गवर्नर तक कर चुके तारीफ
पर्ल साइंटिस्ट डॉ. अजय कुमार सोनकर की तारीफ पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर जगदीशमुखी कर चुके हैं। वह डॉ. सोनकर को अपने साथ लेकर नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भी गए थे। इसके वीडियो उपलब्ध हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा था कि पर्ल कल्चर के जरिए डॉ. सोनकर ने अंडमान को देश, दुनिया में नई पहचान दिलाई है।
कोट:::
मैं, बेचारा नहीं, साइंटिस्ट हूं। दुनिया के अलग-अलग देशों में पर्ल कल्चर के साइंटिस्ट की मांग है। जहां जाऊंगा, वहीं पर्ल कल्चर पर काम शुरू कर दूंगा। इस कल्चर में एडवांस तकनीक का विशेषज्ञ हूं, जिसे अंडमान निकोबार के कुछ नौकरशाह नहीं समझ पा रहे हैं। जो घटनाक्रम हुआ, वह व्यक्तिगत नहीं, देश को नुकसान पहुंचाने वाला है। सीप के साथ घंटों समुद्र के अंदर रहता था। भूल जाता था कि सिलिंडर में ऑक्सीजन है। समुद्र के अंदर 74 हजार से ज्यादा सीप की कॉलोनी बसाई थी, जो अब नष्ट हो गई। एक तरह से मेरे अंदर के साइंटिस्ट की हत्या कर दी गई।
डॉ. अजय कुमार सोनकर