मंडल के सभी जिलों में होगी प्राइवेट बैंकों की कारगुजारी की जांच
गोरखपुर। पंजीकृत बैनामा अभिलेख और संपत्तियों पर लोन देने के मामले में प्राइवेट बैंकों की गैरकानूनी कारगुजारी के चलते गोरखपुर निबंधन कार्यालय को करोड़ों की चपत लगने का मामला सामने आने के बाद अब मंडल के अन्य जिलों में भी जांच होगी। डीआईजी स्टांप रामानंद सिंह का कहना है कि प्राइवेट बैंकों की तरफ से गोरखपुर की ही तरह मंडल के अन्य जिलों में भी विभाग को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का अंदेशा है। ऐसे में अब गोरखपुर के साथ ही देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के रजिस्ट्री विभाग से भी मामले की जांच कराई जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में ही गोरखपुर के रजिस्ट्री विभाग को करीब छह करोड़ से अधिक के राजस्व के नुकसान का अंदेशा है। अभी तक की जांच में सिर्फ एक प्राइवेट बैंक (एचडीएफसी) से ही डेढ़ करोड़ के नुकसान के संकेत मिले हैं।
100 रु पये के स्टांप पर खानापूरी
रजिस्ट्री विभाग के मुताबिक बैंक, जमीन-मकान जैसी संपत्ति के साथ ही पंजीकृत बैनामे के अभिलेख (डीड) पर भी लोन देता है। स्टांप एक्ट के तहत ऐसे किसी भी लोन को स्वीकृत करते समय लोन की धनराशि के मुताबिक पांच रुपये प्रति हजार से लेकर अधिकतम दस हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा करनी होती है। डीड बंधक रखने के मामले में बैंक कागजात तैयार कराता है और उसमें लोन की रकम के मुताबिक स्टांप लगाता है। वहीं, संपत्ति बंधक रखने के मामले में दोनों सुविधा होती है। मसलन या तो बैंक कागजात तैयार कराएगा (स्टांप ड्यूटी के साथ) या फिर कर्ज लेने वाला रजिस्ट्री दफ्तर में रजिस्ट्रेशन कराएगा, मगर डीड और संपत्ति दोनों पर ही लोन देने के मामले में ज्यादातर प्राइवेट बैंक की तरफ से सिर्फ 100 रुपये का स्टांप पेपर लगाकर खानापूरी कर दी जाती है।
कोट-
मामला गंभीर है। गोरखपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में प्राइवेट बैंकों द्वारा ऐसी अनियमितता बरती जा रही है। गोरखपुर में जांच शुरू कर दी गई है। एचडीएफसी बैंक से रिकार्ड मंगाए गए हैं। देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी जांच कराई जाएगी। विभागीय मीटिंग के संबंध में अभी लखनऊ हूं। जैसे ही गोरखपुर लौटूंगा। जांच के संबंध में निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। - रामानंद सिंह, डीआईजी स्टांप, गोरखपुर