रोजी-रोटी के जुगाड़ में देश छोड़ यूएई गए जिले के कप्तानगंज के जसईपुर निवासी ध्रुवचंद्र पिछले एक साल से वहां फंसे हैं। ध्रुव एक ऐसे पानी के जहाज पर हैं, जिसके परिचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जहाज पर ध्रुव के साथ 32 अन्य भारतीय भी हैं। इनमें से 27 को पिछले 16 महीने से वेतन के रूप एक रुपया भी नहीं मिला है। उन्हें न तो शुद्ध से भोजन मिल रहा है और न ही घर वापसी का कोई रास्ता।
मामले की जानकारी मिलने के बाद से ध्रुवचंद के घरवाले परेशान हैं। पिता रामदेव प्रजापति व मां जशोदा ने बताया कि ध्रुव शादी के पांच माह बाद ही विदेश चला गया था। उन्होंने बताया कि ध्रुव 12 अप्रैल 2017 को मुंबई की किसी कंपनी के माध्यम से आठ महीने के अनुबंध पर यूएई गया था।
12 दिसंबर 2017 को उसका अनुबंध समाप्त हो गया। तब से वह वापसी की कोशिश में जुटा हुआ है। वहां उसे भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है। पत्नी लखनऊ में स्टाफ नर्स है, जबकि छोटा भाई प्रेमचंद्र दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है। सभी परेशान हैं।
रामदेव ने बताया कि दो-तीन से ध्रुव इंटरनेट कॉलिंग व व्हाट्सएप मैसेज भेज मदद की गुहार लगा रहा है। वह राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कार्यालय को भी ट्वीट कर चुका है। ध्रुव ने इसका स्क्रीन शॉट भेजा है।
छोटा भाई राष्ट्रपति भवन से संपर्क कर भाई की वापसी सुनिश्चित कराने में जुटा हुआ है। डीआईजी दिलीप कुमार का कहना है कि परिवार के लोगों ने अभी पुलिस को सूचना नहीं दी है। फिर भी मामला संज्ञान में आने के बाद से पुलिस अपने स्तर से प्रयास कर रही है।