हिंदी, मराठी, बंगाली, पंजाबी और गुजराती। इन पांच भाषाओं में हजारों छात्राओं के एक सुर-ताल के साथ शुक्रवार को गोरखपुर महोत्सव का आगाज हुआ। गणेश आराधना के बाद ‘मुंबई युवक बिरादरी’ के मंच संभालते ही महोत्सव के रंग फूट पड़े।
तिरंगी टोपी लगाए मंच के नीचे बैठी छात्राओं ने जब एक साथ बिरादरी के कलाकारों के साथ सुर और ताल मिलाया तो गोरखपुर यूनिवर्सिटी का पूरा कैंपस गूंज उठा। अलग-अलग भाषाओं में देश की एकता, अखंडता बनाए रखने के साथ ही सामाजिक सरोकारों और सफाई से जुड़े संदेशों से गुहे गीतों का सिलसिला करीब 40 मिनट तक चलता रहा।
एक-एक कर हिंदी, पंजाबी, मराठी और गुजराती गीतों के बाद जब बारी कव्वाली की आई तो माहौल में गरमाहट और बढ़ गई। छात्राओं का उत्साह अचानक बढ़ गया। मंच पर बैठे अतिथियों और दर्शक दीर्घा में भी हलचल बढ़ गई। जो जहां था, वहीं से झूमते हुए सुर से सुर मिलाने लगा। ‘एक सुर-एक ताल’ का यह कार्यक्रम जब समाप्त हुआ तो कैंपस तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले जिला जज रंगनाथ पांडेय, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति अशोक कुमार, आईजी हरिराम शर्मा, कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद, डीआईजी शिव सागर सिंह, डीएम ओएन सिंह, एसएसपी अनंत देव, जीडीए उपाध्यक्ष शिव श्याम मिश्रा और गीडा सीईओ ने दीप जलाकर चार दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ किया।
इस मौके पर कुलपति ने कहा कि करीब डेढ़ दशक बाद यहां के लोगों को इस महोत्सव का साक्षी बनने का मौका मिला है। इसके लिए आयोजक मंडल बधाई का पात्र है। यहां के युवा जितने ऊर्जावान हैं, उतनी ऊर्जा किसी भी क्षेत्र के युवाओं में नहीं दिखती। आईजी ने कहा कि भारत धार्मिक देश है। यहां विभिन्न धर्म, जाति और संस्कृति के लोग हैं। इस महोत्सव में सभी शामिल हैं जो आपसी भाईचारा, सौहार्द और सहिष्णुता को बढ़ाता है। मेले और महोत्सव हमारी संस्कृति को संजोने का काम करते हैं। हमें ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जिससे समाज से बुराई भाग जाए और सिर्फ अच्छाई ही बची रहे।
बुराई का विरोध करने के लिए सभी को हौसला दिखाना होगा। अगर अभी से हम अपने बच्चों के भविष्य व उनकी सुरक्षा को लेकर सचेत नहीं हुए तो आने वाला समय हमें माफ नहीं करेगा। डीआईजी ने कहा कि इस तरह के क ार्यक्रम आपसी सौहार्द बढ़ाते हैं। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। डीएम ने कहा कि जिले की अलग पहचान कायम करने में यह महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा।