36 साल बाद एक बार फिर वह दौर आ गया है जब गोरखपुर के हॉकी खिलाड़ियों की प्रतिभा का लोहा पूरा विश्व मानेगा। हालांकि प्रीति दुबे का चयन कई मायनों में खास है। बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गई हैं जो ओलंपिक में खेलने जा रही हैं। इसके साथ ही कम उम्र में ही ओलंपिक में शामिल होने का प्रीति ने रिकॉर्ड बना दिया है।
इसके पूर्व यह उपलब्धि वर्ष 1964 टोकियो ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पुरुष हॉकी टीम के सदस्य तिवारीपुर के मो. अली सईद, वर्ष 1980 में मास्को ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी की कप्तान प्रेममाया के नाम थीं। हालांकि भारतीय टीम मास्को ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही। एक दौर वह था जब भारतीय पुरुष और महिला हॉकी में एक सदस्य गोरखपुर का जरूर होता था। मो. अली सईद, प्रेम माया के बाद आरपी सिंह, रंजना गुप्ता, दिवाकर राम ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर भारतीय टीम से खेलते हुए देश का नाम रोशन किया। लेकिन बीच के सालों में एकदम से हॉकी में सूखा पड़ गया। विगत दो साल से प्रीति ने उस सूखेपन को अपनी प्रतिभा से दूर किया और आज वह दिन आ गया जब प्रीति की उपलब्धि पर हर कोई गर्व कर रहा है।
स्पोर्ट्स कॉलेज में मना जश्न
वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में मंगलवार को महिला हॉकी खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। जश्न में उनका साथ उप खेल निदेशक और प्रधानाचार्य संतोष रावत और प्रीति की कोच रही शशि नवैत भी शामिल र्हुइं। प्रीति ने वर्ष 2008 में कक्षा छह में यहां प्रवेश लिया था। कक्षा सात, आठ, नौ के बाद वह वर्ष 2012 में महिला हॉकी एकेडमी ग्वालियर चली गईं। संतोष ने बताया कि पिछले माह 13 जून को वह कॉलेज आई थीं। बातचीत के वक्त कहा कि था कैंप में इतनी जान लगा दो कि चयनकर्ता चयन के लिए मजबूर हो जाएं। प्रीति की कोच रहीं शशि नवैत ने बताया कि एक प्रशिक्षक के लिए इससे बड़ी खुशी और कुछ नहीं हो सकती है उसकी शिष्य ओलंपिक खेले।
प्रदेश सरकार देगी 10 लाख का ईनाम
यूपी सरकार ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि रियो डि जेनेरियो ओलम्पिक गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को 10 लाख रुपए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा। इससे पहले मार्च महीने में हॉकी फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें अपकमिंग अवार्ड ऑफ दि ईयर के खिताब से भी नवाजते हुए दस लाख रुपये का इनाम दिया था।
फिर लौट आया हॉकी का गौरव
प्रीति दुबे का ओलंपिक में खेलना गोरखपुर के लिए गौरव की बात है। प्रीति को इसके लिए ढेरों शुभकामनाएं। बस अब प्रीति को मौके का पूरा लाभ उठाना चाहिए। ओलंपिक में अब तक की सबसे बेहतर प्रदर्शन करनी चाहिए।
- मो. अली सईद, ओलंपियन
ग्वालियर जाने का निर्णय सही
शहर में महिला हॉकी खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। प्रीति ने वही कर दिखाया। ग्वालियर जाने का निर्णय सबसे सही था। बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में एस्ट्रो टर्फ लग जाने के बाद और भी खिलाड़ी आगे निकलेंगे
- प्रेम माया, ओलंपियन और रेलवे क्रीड़ा अधिकारी
यह है उपलब्धियां
जूनियर भारतीय टीम से खेलते हुए न्यूजीलैंड, हालैंड, चीन का दौरा किया
सीनियर टीम की ओर से अर्जेन्टिना, एशिया कप, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया का दौरा किया
गुवाहाटी में हुई साउथ एशियन गेम में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की रही
हॉकी इंडिया ने मार्च में आयोजित दूसरे वार्षिक पुरस्कार समारोह में उभरती खिलाड़ी के रुप में चुना और पुरस्कार स्वरूप 10 लाख और साउथ एशियन गेम में नेपाल के खिलाफ टीम की ओर से पहला गोल दागने पर दिया एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला
वर्ष 2014 में जूनियर टीम और नवंबर 2015 से सीनियर महिला टीम की सदस्य