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गोरखपुर-बस्ती मंडल में कांग्रेस का ‘पिछड़ा’ दांव

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गोरखपुर-बस्ती मंडल में कांग्रेस का ‘पिछड़ा’ दांव
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गोरखपुर। पूर्वांचल की खोई राजनीतिक जमीन पाने के लिए कांग्रेस ने गोरखपुर-बस्ती मंडल में ‘पिछड़ा’ दांव खेला है। सात में तीन जिलाध्यक्ष अति पिछड़े संवर्ग से हैं। चार जिलों में दलित, मुस्लिम, क्षत्रिय और ब्राह्मण चेहरे पर भरोसा जताकर पार्टी ने सामाजिक समीकरण को भी साधने की कोशिश की है। गोरखपुर में महिला निर्मला को कमान देकर कांग्रेस ने भाजपा के साथ ही बसपा और सपा को घेरा है। निर्मला एससी संवर्ग से आती हैं। गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में दो लाख से ज्यादा दलित मतदाता भी हैं।
2017 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी। विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस ने कुशीनगर की तमकुहीराज विधानसभा सीट जीती थी। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ इसी सीट से विधायक हैं लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने धुआंधार चुनाव प्रचार किया था, फिर भी भाजपा की सुनामी चली। दोनों मंडलों की नौ लोकसभा सीटें भाजपा ने जीत ली थी।
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अब कांग्रेस नाकामियों को पीछे छोड़कर मिशन 2022 की तैयारी में जुटी है। इसी लिहाज से पिछड़ा, दलित, मुस्लिम, क्षत्रिय और ब्राह्मण दांव खेला गया है। साथ ही युवाओं को तरजीह देकर कांग्रेस में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। पार्टी ने संतकबीरनगर से प्रवीन चंद्र पांडेय को जिलाध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया है। इस क्षेत्र से भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी दो बार सांसद रह चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वह बसपा के टिकट पर अच्छा चुनाव लड़े थे। अब कांग्रेस ने ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष बनाकर सेंधमारी की कोशिश की है। सिद्धार्थनगर में काजी सोहेल अहमद को जिलाध्यक्ष बनाकर दोनों मंडलों के मुस्लिमों को साधा है। इस जिले की डुमरियागंज लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी है।
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सैंथवार बिरादरी को साधने की कोशिश
कांग्रेस ने देवरिया का जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सैंथवार को बनाया है। इसका असर दूर तक जाने की उम्मीद है। पार्टी नेताओं का मानना है कि गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया की कई विधानसभा सीटों पर सैंथवार निर्णायक भूमिका में हैं। गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में ही करीब दो लाख सैंथवार मतदाता हैं। ओबीसी का यह तबका एकजुट रहता है। कुशीनगर में भी राज कुमार सिंह सैंथवार को जिलाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने इस बिरादरी को रिझाने की कोशिश की है। कुशीनगर को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस क्षेत्र से आरपीएन सिंह सांसद थे। वह भी सैंथवार हैं। बस्ती के जिलाध्यक्ष अंकुर वर्मा बनाए गए हैं। वह भी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
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