सूरजकुंड धाम और रसूलपुर वार्ड ने गोरखपुर शहर को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) होने की राह में रोड़ा अटका दिया है। इन वार्ड के लोगों ने नगर निगम में आपत्तियां भेजकर कहा है कि शौचालय न होने से वार्ड के कई लोग अब भी खुले में शौच करने जाते हैं। इन आपत्तियों से मुख्यमंत्री की उस मंशा पर भी पानी फिर गया, जिसमें उन्होंने 31 दिसंबर तक गोरखपुर शहर को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य तय किया था। हकीकत भी यही है कि अब भी शहर के कई इलाकों ऐसे हैं जहां लोग खुले में शौच को जाते हैं।
नगर निगम ने शहर के 70 वार्डों को ओडीएफ घोषित करते हुए लोगों से 30 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी थीं। अगर किसी वार्ड से इस संबंध में शिकायत न मिलती तो नगर निगम 31 दिसंबर को शहर को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर देता, लेकिन सूरजकुंड धाम और रसूलपुर वार्ड से कई आपत्तियां आने से नगर निगम की मंशा को झटका लगा।
मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि इन दोनों वार्डों से आपत्तियां मिली हैं। उधर, नगर आयुक्त प्रेमप्रकाश सिंह का कहना है कि दो जनवरी को दोनों वार्डों में विभागीय कर्मचारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी। जिनके घर शौचालय नहीं होंगे, उनसे आवेदन लेकर वहां जल्द शौचालय बनवा दिए जाएंगे।