गोरखपुर विश्वविद्यालय में नाथपंथ के शब्दकोश पर मंथन करेंगे देशभर के विद्वान
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय मेंमहायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 14 व 15 दिसंबर को संवाद भवन में आयोजित की जाएगी। ‘विश्वकोश निर्माण : योजना एवं क्रियान्वयन के विविध आयाम’ विषयक गोष्ठी का उद्घाटन 14 दिसंबर को सुबह 10.30 बजे होगा। संगोष्ठी में देशभर से नाथपंथ पर अध्ययन करने वाले विद्वान जुटेंगे और शब्दावली प्रस्तुत करते हुए गहन मंथन करेंगे।
शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो रविशंकर सिंह ने बताया कि उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के कुलाधिपति डॉ बलवंत शांतिलाल जानी, विशिष्ट अतिथि उड़ीसा के महंत शिवनाथ होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविवि के कुलपति प्रो विजय कृष्ण सिंह करेंगे। सभी कार्यशालाएं गुरु गोरक्षपीठ शोधपीठ भवन पर होंगी।
प्रथम सत्र के अध्यक्ष प्रो नरेश प्रसाद भोक्ता होंगे और कर्नाटक के डॉ चंद्रमौलि नयकार, बीएचयू के प्रो धनंजय पांडेय, गुवाहाटी असम के प्रो प्रफुल्ल कुमार नाथ व्याख्यान देंगे। डॉ सुशील पांडेय और डॉ सुनील पांडेय शोध पत्रों को पढ़ेंगे। द्वितीय सत्र दोपहर दो बजे से चार बजे तक चलेगा। इसके सत्र अध्यक्ष प्रो मुरली मनोहर पाठक होंगे। मध्यस्थ की भूमिका में डॉ वेद प्रकाश राय व प्रतिवेदक डॉ मनीष कुमार होंगे। इस सत्र में प्रो डीएन राय व प्रो संतोष शुक्ल व्याख्यान देंगे।
तृतीय सत्र सवा चार बजे से साढ़े छह बजे तक का होगा। इस सत्र में प्रो राजवंत राव अध्यक्षता करेंगे और महंत शिवनाथ, प्रो उमाशंकर त्रिपाठी व प्रो नारायन हलदर व्याख्यान देंगे। शाम सात बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होगा। वहीं 15 दिसंबर को सुबह 10.30 बजे से चौथे सत्र की अध्यक्षता प्रो गोपाल प्रसाद करेंगे और इस सत्र में डॉ एसके जोगी, डॉ विजयेंद्र पांडेय अपना व्याख्यान देंगे। पांचवें सत्र दोपहर एक बजे से शुरू होगा। इसमें कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो हर्ष कुमार सिन्हा हैं। डॉ अनुज प्रताप सिंह, डॉ राधिका पारसनीस और प्रो राम दरश राय का व्याख्यान होगा। शाम तीन बजे से समापन सत्र की शुरुआत होगी।
काउंटर पर भी जमा होंगे आलेख, शोधपत्र
अगर कोई अपना आलेख और शोधपत्र किन्हीं कारणों से नहीं भेज पाया है तो वह संगोष्ठी स्थल पर बने काउंटर पर जमा कर सकता है। उसे भी शामिल किया जाएगा। विश्वकोश संपादक मंडल की समीक्षा एवं उसकी संस्तुति पर ही आलेख या शोधपत्र संपादित होकर विश्वकोश का हिस्सा बनेंगे।
शोध पीठ की प्रकाशित पुस्तकें
नाथपंथ का समाज दर्शन, सृष्टि राजन और योग का विज्ञान, नाथपंथ, गोरखबानी, अउर भोजपुरी, नाथ प्रज्ञा (प्रकाशनाधीन शोध पत्रिका)