जीडीए, शहर को एक और बड़े पार्क की सौगात देगा। इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आर्किटेक्ट को पार्क का नक्शा तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। वाटर पार्क के पास खाली पड़ी जीडीए की 14 एकड़ जमीन में से पांच एकड़ में इस पार्क का निर्माण कराया जाएगा। इसे लखनऊ के लोहिया पार्क की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। प्राधिकरण का कहना है कि यह पार्क शहर की एक और नई पहचान बनेगा।
जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने बताया कि पार्क में कम से कम एक किलोमीटर लंबे जॉगिंग ट्रैक के साथ ही योगा सेंटर और बड़ी फुलवारी होगी। इसके अलावा ओपन जिम और बच्चों के लिए पार्क का एक बड़ा हिस्सा किड्स कार्नर के तौर पर विकसित किया जाएगा, जहां झूलों के साथ ही उनके खेलने के कई साधन होंगे। बताया कि आर्किटेक्ट को पार्क का ब्लू प्रिंट तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। आठ नवंबर तक उनसे यह ब्लू प्रिंट उपलब्ध कराने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें फेरबदल के बाद पार्क का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा यही नहीं शहर में स्थित प्राधिकरण के दूसरे पार्क भी दुरुस्त कराए जाएंगे। करीब दो साल पहले ही प्राधिकरण ने अपने आधा दर्जन पार्क ों के अलावा उद्यान विभाग के व्ही पार्क की मरम्मत और सुंदरीकरण कराया था। मगर देखरेख के अभाव में इनमें से कई पार्क फिर बदहाल हो गए हैं।
ऑडिटोरियम भी बनेगा
चंपा देवी पार्क के सामने की जमीन पर प्राधिकरण एक एसी ऑडिटोरियम बनाने की भी तैयारी कर रहा है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का कहना है कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन को छोड़ दें ते शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कोई मुफीद जगह नहीं है। ऐसे में अगर ऑडिटोरियम बनता है तो निश्चय ही शहर में सांस्कृतिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
व्यू बनाएगा जीडीए की नई आवासीय योजना को खास
चंपा देवी पार्क के सामने की जमीन पर प्रस्तावित नई आवासीय योजना के फ्लैट के सामने का व्यू, जीडीए की इस योजना को खास बनाएगा। 14 एकड़ की खाली पड़ी इस जमीन के पीछे पांच एकड़ में 14-14 फ्लोर के तीन टॉवर बनाए जाएंगे। प्राधिकरण इस आवासीय योजना से ही सटे पांच एकड़ की जमीन पर पार्क बनाने की भी तैयारी कर रहा है।
प्राधिकरण इस तैयारी में जुटा है कि इन तीनों टावर को इस तरह बनाया जाए कि उनके ज्यादातर फ्लैट की खिड़कियां और बालकनी, पार्क या फिर रामगढ़ताल की तरफ खुले। बता दें कि इस आवासीय योजना का प्रस्ताव अभी हाल ही में हुई जीडीए बोर्ड बैठक में भी रखा गया था। मगर कुछ सदस्यों की आपत्ति पर उसे अगले बैठक के लिए टाल दिया गया। सदस्यों का कहना था कि शहर में कहीं भी इतनी खाली जमीन नहीं है। अगर वहां भी निर्माण हो गया तो सभाएं, रैली आदि कार्यक्रम कहां होंगे।
वहीं प्राधिकरण का कहना है कि सभाएं और रैली आदि के लिए शहर में बहुत सी जगहों के विकल्प है। रामगढ़ताल के करीब होने की वजह से प्राधिकरण इस जमीन को इस तरह विकसित करना चाहता है कि मुंबई, कोलकाता समेत नदी और समुद्र के किनारे बसे दूसरे शहरों की ही तरह यहां के लोगों को भी ऐसा आशियाना मिले जहां से वह प्रकृति का नजारा ले सकें। उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने बताया कि आर्किटेक्ट को नक्शा तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। पूरा प्रयास कर अगली बोर्ड बैठक में योजना को स्वीकृत कराया जाएगा ताकि जल्द ही निर्माण शुरू हो सके।