पुलिस के भरोसे में फंस गया अरविंद
राजघाट पुलिस ने उसे व्यापारिक मित्र दिनेश से लेनदेन के विवाद में बुलाया था। सूत्रों की माने तो भरोसा भी पुलिस ने यही दिलाया था कि आपसी बातचीत के बाद मामला रफा दफा हो जाएगा। राजघाट थाना पुलिस भी इसी में लगी थी लेकिन भनक आला अफसरों को भी लग गई। जिसके बाद सीओ कोतवाली ने सख्ती दिखाई और एसएसपी तक मामला पहुंचने के बाद केस दर्ज कर लिया गया। पीड़ितों ने खुद ही आला अफसरों तक अपनी फरियाद पहुंचाई थी।
इनकम टैक्स अफसर और सांसद को भी नहीं छोड़ा
गोरखपुर में पहले तैनात रहे दो इनकम टैक्स अफसर, भाजपा सांसद से भी जमीन और फ्लैट देने के नाम पर अरविंद ने रुपये ऐंठे थे। तीन साल से कैंट पुलिस उसके पीछे लगी थी लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी।
लखनऊ में किराए के मकान में हो गया था शिफ्ट
डॉक्टरों को ठगी का शिकार बनाने के बाद डॉ. अरविंद ने शहर छोड़ दिया था। वह परिवार के साथ लखनऊ में किराए के मकान में शिफ्ट हो गया था। सूत्रों की माने तो वह किराए का घर बदलता रहता है। इसके चलते पकड़ में नहीं आ रहा था।
अरविंद की डाक्टरी की डिग्री पर भी सवाल
डॉ. अरविंद की डिग्री पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। पिता की आम सोहबत अच्छा होने की वजह से किसी ने ध्यान नहीं दिया। शुरुआत में उसने खुद को आर्थों के विशेषज्ञ के रूप में मशहूर किया। लेकिन बाद में जालसाजी करने लगा।
आरोपी के खिलाफ राजघाट थाने में भी केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजा गया है। आरोपी पर कैंट थाने में भी केस दर्ज है। - बीपी सिंह, सीओ कोतवाली