गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन के निर्माण को लेकर चल रही लंबे समय से कवायद के बीच उसके निर्माण की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। सड़क का सीमांकन होने के बाद दूसरे चरण के नोटिफीकेशन की प्रक्रिया हो रही है। उसके बाद जमीन का मूल्यांकन होने के बाद किसानों में मुआवजे का वितरण होगा। फिर जमीन का अधिग्रहण कर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एनएचएआई की तरफ से टेंडर आमंत्रित किया गया है, पर जब तक जमीन उपलब्ध नहीं होगी तब तक टेंडर नहीं खोला जाएगा।
एनएच 29 को फोरलेन बनाने की घोषणा केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद की गई। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गोरखपुर दौरे के दौरान निर्माण पर खर्च होने वाली 2500 करोड़ की धनराशि देने की बात कही। साथ ही कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने के लिए कहा। उसके बाद से सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई। जिनकी जमीन और मकान सड़क में पड़ रहे हैं उनको नोटिस देकर बुलाया गया।
आपसी सहमति के बाद यह तय हुआ कि गोरखपुर से बड़हलगंज के बीच दो बाईपास का निर्माण होगा। अब दूसरी बार नोटिफीकेशन की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही जमीन के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से किसानों की जमीन का मुआवजा निर्धारित करने के बाद उसका वितरण किया जाएगा। जैसे ही किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा दे दिया जाएगा जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा। उसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गोरखपुर से बड़हलगंज के बीच लगभग 60 किलोमीटर लंबे मार्ग पर दो स्थानों पर बाईपास बनाए जाएंगे। इसमें 122 हेक्टेयर किसानों की जमीन सड़क में आएगी। किसानों को उनकी जमीन का वर्तमान में जो मूल्य निर्धारित है उसके हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।
एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक एपी कुशवाहा ने बताया कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। भूमि अध्याप्ति अधिकारी जमीन का मूल्यांकन कर किस किसान को कितना मुआवजा देना है उसकी सूची तैयार करेंगे। इसके लिए उन्हें कहा गया है। मुआवजा वितरण के बाद जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। जमीन मिलने के बाद टेंडर खोला जाएगा। उसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।