मानबेला में जीडीए को जमीन देने को लेकर किसान भले तैयार हैं, लेकिन वह इसका 10 फीसदी रकबा विकसित होने के बाद लेने के पक्ष में नहीं हैं। किसानों का कहना है कि जमीनें बिना विकास शुल्क लिए उन्हें आवंटित की जाएं, इसे वह खुद विकसित कर लेंगे। इसके साथ ही पूर्व में चुकाई गई ब्याज और विस्थापन मद में दी गई राशि को समझौते में तय की गई रकम से न काटने की मांग भी किसान कर रहे हैं। मानबेला किसानों की लड़ाई लड़ रहे किसान मजदूर संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष बरकत अली के नेतृत्व में मंगलवार को प्रेसवार्ता में ये बातें कहीं।
बरकत अली ने कहा कि जीडीए वीसी के साथ हुई बैठक में अधिग्रहण के लिए किसानों ने सहमति तो दे दी है, लेकिन कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो पाया है। पहले दी गई रकम में किसानों को सोलेसियम और ब्याज के तौर पर जो भुगतान दिया गया था उसे मौजूदा तय मुआवजे में न काटा जाए। साथ ही किसानों को जीडीए की ओर से जो प्लॉट विकसित करके दिए जाने हैं वो किसानों को बिना विकसित किए दिए जाएं। बदले में जीडीए किसान को उस जमीन का मुआवजा न दे। प्रेसवार्ता में संघर्ष समिति के संरक्षक हरिद्वार पांडेय, रामप्रताप मौर्य, चंद्रभान सिंह आदि मौजूद थे।
दो दिन बाद सीएम से मिलने जाएगा प्रतिनिधिमंडल
बरकत ने कहा कि उनकी लड़ाई योगी आदित्यनाथ ने ही लड़ी है। सीएम ने पूर्व में हुई वार्ता के दौरान किसानों को मुआवजा बढ़ाने की जानकारी देते हुए जीडीए वीसी के साथ बैठकर विवाद सुलझाने को कहा था। उनके कहे के मुताबिक किसानों ने जीडीए के साथ समझौता कर लिया है। लेकिन कुछ बिंदुओं पर जीडीए की ओर से स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। इसे लेकर दो दिन बाद किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिलने जाएगा। किसानों को पूरा भरोसा है कि ये मुद्दे भी सुलझ जाएंगे।
विकास शुल्क न ले जीडीए
किसान उचित मुआवजे को लेकर 12 साल से संघर्षरत थे। किसानों की मांग के अनुरूप मुआवजा देने को लेकर जीडीए ने सहमति दे दी है। किसानों को जीडीए कुल रकबे का 10 फीसदी हिस्सा विकसित करके देगा। हमें ये जमीन बिना विकसित किए दी जाए, क्योंकि कई किसानों के लिए विकास शुल्क की व्यवस्था करना कठिन होगा।
- अमृतलाल भारती, उपाध्यक्ष, किसान मजदूर संघर्ष समिति
ब्याज और सोलेसियम की राशि न काटे जीडीए
पूर्व में जमीन के बदले किसानों को 11.76 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा तय हुआ था। तब किसानों को 30 फीसदी सोलेसियम राशि और ब्याज जोड़कर 18.76 लाख रुपये प्रति एकड़ भुगतान दिया गया। अब नए सिरे से प्रति एकड़ 28 लाख मुआवजा तय हुआ है। इस बार ब्याज और सोलेसियम राशि नहीं मिल रही। ऐसे में पूर्व में दी गई यह राशि मुआवजे से काटी न जाए।
- बेचन निषाद, किसान, मानबेला
सीएम को धन्यवाद दे रहे किसान
एक हजार से ज्यादा किसानों से जुड़े इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ ने शुरू से ही सराहनीय भूमिका निभाई। उनके सीएम बनने के बाद हमें आस थी कि मामले में हमारे पक्ष में ही फैसला आएगा। सीएम के हस्तक्षेप के बाद अफसर सक्रिय हुए और नए सिरे से मुआवजा राशि की समीक्षा की गई। किसानों की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उनका धन्यवाद।
- रामउजागिर शर्मा, किसान
सोलेसियम, ब्याज और विकास शुल्क पर होगी बात
जल्द ही किसान मजदूर संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिलेगा। उन्हें समझौते में स्पष्ट न किए गए बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। उम्मीद है कि सीएम से मिलने के बाद इन बिंदुओं को लेकर जारी किसानों की उलझन भी सुलझ जाएगी। पूरे प्रकरण में सीएम आदित्यनाथ की भूमिका सराहनीय रही। उनके सीएम बनने के बाद प्रशासन इस मामले के निस्तारण के लिए सक्रिय हुआ।
- भोला, मीडिया प्रभारी, किसान मजदूर संघर्ष समिति