दिसंबर में ठंड बढ़ने के साथ ही साइबेरियन और हिमालय क्षेत्र से आने वाले पक्षियों ने जिले के बांधों, झीलों और तालाबों में डेरा डाल लिया है। इनकी अठखेलियां देखने के लिए दूरदराज से सैलानी भी आ रहे हैं। वहीं, इन पक्षियों का शिकार करने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। वे धड़ल्ले से शिकार कर रहे हैं। इस ओर से विभाग आंख बंद किए हुए है।
दिसंबर से जनवरी माह में हर साल प्रवासी पक्षी जिले के बांधों, तालाबों व कुंडों में रहने को आते हैं। ठंड बढ़ते ही छोटा राजहंस, सारस, काला सिर का ढोमरा, ढोमरा, अवलख बत्तख, मालंग बगुला, सिलेटी सवन, चामा अंजन, सुर्खाव बतख, ठेकरी, चौवाहा, छोटा लालसर, कुर्च, जलीय बतख, घोंघिल, टिटहरी, सींकपर, गजपांव, जलमुर्गी आदि पक्षियों ने सुकुवां ढुकुवां, गोविंद सागर बांध, शहजाद बांध, राजघाट बांध सहित विभिन्न तालाबों व कुंडों में डेरा जमा लिया है। इन्हें देख शिकारी भी सक्रिय हो गए हैं।
प्रतिदिन सुबह चार से पांच बजे एवं शाम ढलते ही इन पक्षियों का शिकार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा जल मुर्गी, ठेकरी व लालसर पर शिकारियों की नजर है। जानकारों का कहना है कि ललितपुर रेंज में गोविंद सागर बांध किनारे बसे गांव बम्होरी, मसौरा, जीरोन, मुहल्ला नई बस्ती, लेड़ियापुरा में शिकारी सक्रिय हैं।
सभी क्षेत्रों के वनाधिकारी अवैध खनन, कटान एवं शिकार को रोकने के लिए गश्त कर रहे हैं। यदि शिकार का मामला प्रकाश में आता है तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। वनाधिकारियों से प्रतिदिन की सूचना मांगी जा रही है। इसके अलावा वह स्वयं निगरानी कर रहे हैं।
आरएस यादव, एसडीओ वन