बाढ़ की त्रासदी को सुनकर एकतरफ जहां दूर दराज से लोग अपने रिश्तेदारों और घरवालों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं और उन्हें हर संभव मदद देने का जतन करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी जवान हैं जो घर के पास रहने के बाद भी फर्ज के आगे अपने परिवार को छोड़कर दूसरों का दर्द बांटने में जुटे हैं। नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स (एनडीआरएफ) के जवान संतोष यादव के इस जोश और जज्बे को उनके साथी भी सलाम करते हैं। ऐसा नहीं हैं कि इन हीरोज को अपने घर या परिवार की चिंता नहीं सताती है, मगर इनके लिए फर्ज पहले पायदान पर है, उसके बाद परिवार।
डोमिनगढ़ में राहत और बचाव कार्य में जुटे संतोष ने बताया कि वो पीपीगंज के बजही गांव के रहने वाले हैं। पिछले आठ दिनों से उनका खुद का घर रोहिन की बाढ़ से घिरा है। घर में बूढ़े मां बाप के साथ पत्नी और दो बच्चे मौजूद हैं। पानी घर में घुसा तो उन्हें फोन पर इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने घर वालों को घबराने की बजाय सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी और पत्नी को माता पिता का ख्याल रखने को कहा। उस समय संतोष की ड्यूटी पिपराइच विधानसभा से जुड़े गांवों में लोगों को राहत मुहैया कराने की लगी थी। उसके बाद वो डोमिनगढ़ से राहत सामग्री लेकर आसपास के इलाकों में मदद पहुंचा रहे हैं। बताया कि फुर्सत के पल में परिवार का कुशल क्षेम पूछते रहते हैं।