फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार पदों पर 40 ने दाखिल किया पर्चा

Tue, 13 Sep 2016 07:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
नामांकन करने जाते छात्रनेता - फोटो : ‌‌shivharsh
विज्ञापन
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के लिए दो दिनी नामांकन प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हुई। पहले दिन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और पुस्तकालय पद के लिए कुल 40 प्रत्याशियों द्वारा 42 पर्चे भरे गए। अध्यक्ष पद के दो प्रत्याशियों ने दो सेट में पर्चा भरा, जिसकी वजह से पर्चों की संख्या प्रत्याशियों की संख्या से दो अधिक हो गई। अध्यक्ष के लिए 10, उपाध्यक्ष के लिए आठ, महामंत्री के लिए 14 और पुस्तकालय मंत्री के लिए आठ प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया। महामंत्री पद के लिए तीन महिलाओं का पर्चा दाखिल करना चर्चा का विषय रहा।
विज्ञापन


नामांकन के लिए अमृता कला वीथिका में यूनिवर्सिटी की चुनाव टेबल तय समय पर 11 बजे सज गई लेकिन पहले एक घंटे माहौल ठंडा रहा। तब तक इक्का-दुक्का प्रत्याशी ही नामांकन के लिए पहुंचे। 12 बजे के बाद चुनावी गहमागहमी बढ़ी और यूनिवर्सिटी गेट पर प्रत्याशी के पक्ष में नारेबाजी का दौर शुरू हो गया। बहुत से प्रत्याशियों ने सारी प्रशासनिक चेतावनियों को अनदेखा करते हुए बाइक और पैदल जुलूस के साथ दस्तक दी। हालांकि नामांकन के लिए प्रत्याशी को केवल पांच समर्थकों के साथ ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। प्रत्याशी ध्यान आकर्षित करने के तरह-तरह के हथकंडे अपनाते दिखे। उपाध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी ने तो पर्चा दाखिल करने जाने से पहले यूनिवर्सिटी गेट पर दीप जलाकर पं. दीनदयाल उपाध्याय का अभिनंदन कर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की। चुनाव अधिकारी प्रो. बैजल ने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए एक छात्रा को वांछित संलग्नक न होने से पर्चा भरने की अनुमति नहीं दी गई।  चुनाव अधिकारी से भिड़े पूर्व पदाधिकारी पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी के तौर पर यूनिवर्सिटी में अपने अधिकार के लिए कई छात्रनेता नामांकन भवन के बाहर जुटे और कुलपति से मिलने की कोशिश करने लगे। मौके पर तैनात पुलिस बल ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे भड़क उठे और भवन के सामने ही धरने पर बैठ गए। जब यह जानकारी नामांकन भवन के अंदर बैठे कुलपति प्रो. अशोक कुमार को हुई तो उन्होंने चुनाव अधिकारी प्रो. संजय बैजल को बाहर भेजा। प्रो. बैजल के बाहर आते ही पूर्व पदाधिकारियों की उनसे बकरीद के दिन नामांकन कराने को लेकर नोकझोंक शुरू हो गई। मामला बढ़ा तो पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पूर्व पदाधिकारियों ने चुनाव अधिकारी से मतदान के दिन परिसर में मौजूद रहने का हक मांगा तो प्रो. बैजल ने यह कहकर इस प्रसंग को रफा-दफा किया कि यूनिवर्सिटी के संविधान में यह अधिकार पूर्व अध्यक्ष को है और वह उसे मिलेगा। पूर्व पदाधिकारियों में दिनेश चंद्र श्रीवास्तव, सुरेंद्र सिंह मुन्ना, दिनेश चंद्र त्रिपाठी, डॉ. रूप कुमार सिंह, राजेश त्रिपाठी, अंशुमान त्रिपाठी, तेज नारायण श्रीवास्तव, अरुण अग्रहरी, संजय सिंह आदि शामिल रहे।  मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए दिखी जद्दोजहद नामांकन पत्र के साथ विकृत चित्त के न होने का मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना प्रत्याशियों के लिए भारी पड़ता दिखा। कई प्रत्याशी की इसे लेकर जद्दोजहद नामांकन के दिन भी जारी रही। इसके पीछे किसी सरकारी संस्थान से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने का भ्रम था। जिला अस्पताल में चल रही संविदाकर्मियों की हड़ताल की वजह से कई प्रत्याशियों ने मेडिकल कॉलेज जाकर यह सर्टिफिकेट बनवाया। ऐसे में वे अंतिम समय में नामांकन दाखिल कर सके। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने किसी भी रजिस्टर्ड चिकित्सक द्वारा जारी सर्टिफिकेट लगाने की अनुमति दी थी। 
विज्ञापन
पदवार इन प्रत्याशियों ने भरे पर्चे अध्यक्ष : जगदंबा सिंह श्रीनेत, कर्मवीर सिंह, योगेश्वर नाथ पांडेय, अभिषेक यादव, अरविंद कुमार, राघवेंद्र प्रताप यादव, चंदन यादव, कृष्ण चंद्र,  संदीप चौहान, संगम सिंह।
उपाध्यक्ष : सुमित राय, हिमांशु त्रिपाठी, अमित कुमार यादव, अनूप कुमार मद्धेशिया, रितेश कुमार, अखिलेश पांडेय, अखिल देव त्रिपाठी।
महामंत्री : सुजीत कुमार सिंह, अभिषेक हरि सिंह, राजीव, विकास पांडेय, ऋचा चौधरी, शिवशंकर गौड़, नितेश कुमार, प्रशस्त पांडेय, निखिल चंद्र उपाध्याय, पवन कुमार पांडेय, अनन्या शुक्ला, गौतम कुमार पांडेय, पवन पांडेय, सोनम पासवान।   
पुस्तकालय मंत्री : अनुभव कुमार पांडेय, इंद्रमोहन यादव, दीपक कुमार यादव, आमिर खान, आनंद कुमार पांडेय, कुंवर उपाध्याय, रंजीत कुमार पासवान, विवेक शर्मा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें