गोरखपुर। दीक्षांत सप्ताह समारोह के आयोजन की श्रृंखला में शनिवार को पेंटिंग प्रदर्शनी ‘त्रिपथगा’ का शुभारंभ हुआ। अमृता कला वीथिका में होने वाली इस प्रदर्शनी में शामिल तीनों कलाकारों की पेंटिंग में दर्शकों को प्रकृति के तीन लोक के दर्शन हुए। डॉ. भारत भूषण ने जहां अध्यात्म को निज के गढ़े प्रतीकों से अभिव्यक्त किया तो डॉ. कुमुद सिंह ने जीवन के मांगलिक आयोजनों को अपनी पेंटिंग में उकेरा। डॉ. निशा जायसवाल ने अपनी मीनिएचर कला से देव लोक के दर्शन कराए।
प्रतियोगिता की शुरुआत करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि प्रदर्शनी में जितनी अच्छी कृतियां हैं उतनी ही अच्छी प्रस्तुतियां भी और शायद यही वजह है कि उतने ही सुधि जनों की मौजूदगी भी है। पिछले कुछ समय से अमृता कला वीथिका में हो रहे लगातार आयोजनों से उत्साहित कुलपति ने वीथिका के एक और तल के निर्माण की घोषणा की। विशिष्ट अतिथि प्रो. मधु कुमार ने कहा कि प्रदर्शनी कलाकारों को और बेहतर करने का उत्साह और हौसला देती है। इससे भारी संख्या में अपनी उपस्थिति जताकर दर्शकों को भी अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।
कुलपति ने तीनों कलाकारों को दीक्षांत स्मृति चिह्न देकर अभिनंदन किया। संचालन प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा ने किया। इस अवसर पर डॉ. हर्ष ने यह भी घोषणा की कि पिछले दिनों आयोजित फोटो प्रदर्शनी के छायाकारों को युवा महोत्सव 25 फरवरी को सम्मानित किया जाएगा।
‘तंरगिणी’ से सुरमयी हुई यूनिवर्सिटी की शाम
गोरखपुर। 34 वें दीक्षांत सप्ताह के पांचवें दिन की शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रही। ‘तंरगिणी’ नाम से हुए इस सांस्कृतिक आयोजन का मुख्य आकर्षण प्रख्यात भरत नाट्यम नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी रहीं। इनकी टीम की ओर से प्रस्तुत रामकथा नृत्य नाटिका सभी के दिल को छू गई।
श्रीराम राम रामेति रामे-रामे मनोरमे पर नृत्य पुष्पांजलि से शुरू हुई नृत्य प्रस्तुति तुलसीदास की चौपाई जाके प्रिय न राम वैदेही... से आगे बढ़ी और फिर शुरू हुई रामकथा। ठुमक चलत रामचंद्र बाजे पैजनिया... छंद पर कलाकारों की भावभंगिमा ने मौजूद दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। राम की बाल्य कथा, दीक्षा, ताड़का वध, सीता स्वयंवर, मंथरा प्रसंग, वन गमन, सीता हरण, रावण वध और विश्व मंगलकामना के साथ भगवान राम के राजतिलक पर प्रस्तुत नृत्य नाटिका को दर्शक अपलक देखते रहे।
इससे पहले ललित कला विभाग की अध्यक्ष डॉ. उषा सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम राजीव मिश्रा ने कहा कि संगीत तो हमारे जेहन में है, यही वजह है हर संस्कार में गीत गाने की परंपरा है। कार्यक्रम की प्रस्तुति ललित कला विभाग की छात्राओं के समूह लोकगीत ‘फागुन में मन फरहर लागे...’ से शुरू हुई। रेलवे जीएम राजीव मिश्रा की पत्नी कुमकुम मिश्रा का लोकगीत लोगों को खूब भाया।
जब यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने ‘मोरे अंगना बदरवा...’ गीत प्रस्तुत किया तो श्रोता झूम उठे। डॉ. लता सिंह की टीम में आरोही, मालवी, रिया झा, सौम्या श्रीवास्तव, सुमन कोठारी, श्याम मुंशी, तालम, अनिरुद्ध जोशी शामिल रहे। मंच संचालन शुभेंद्र सत्यदेव का तो आभार ज्ञापन डॉ. सुधा यादव का रहा।
दीक्षांत समारोह का हुआ पूर्वाभ्यास
गोरखपुर। शनिवार की शाम तीन बजे यूनिवर्सिटी के खेल मैदान में बने मुख्य पांडाल में दीक्षांत समारोह का पूर्वाभ्यास किया गया। इस दौरान यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने मुख्य अतिथि राजनाथ सिंह की भूमिका निभाई तो प्रो. एचएस शुक्ल कुलाधिपति की भूमिका मे नजर आए। मुख्य कार्यक्रम की तरह विद्वत पदयात्रा निकाली गई, इसमें डमी मुख्य अतिथि और कुलाधिपति के अलावा कार्य परिषद व विद्या परिषद के सदस्य शामिल रहे। उसके बाद सभी कार्यक्रम उसी तरह से किए गए, जैसा कि मुख्य आयोजन के दिन किया जाना है। इसमें गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया।
पोस्टर में दिखाया ग्लोबल वॉर्मिंग का सच
गोरखपुर। दीक्षांत सप्ताह समारोह के पांचवें दिन के आयोजनों की श्रृंखला में शनिवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग में ‘द इकॉनोमिक्स ऑफ ग्लोबल वार्मिंग’’ विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले नुकसान को दिखाया गया। एमए के विद्यार्थियों की सहभागिता से आयोजित इस प्रदर्शनी की कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने सराहना की। विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप कुमार ने लोगों का स्वागत किया तो प्रो. पीसी शुक्ल ने आभार ज्ञापन की जिम्मेदारी निभाई।