प्रांतीय अधिवेशन का झंडारोहण कर शुभारंभ करते डॉ. सीएम सिन्हा।
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विश्व हिंदू महासंघ का दो दिवसीय सम्मेलन शुक्रवार को गोरक्षनाथ मंदिर के सभागार में शुरू हुआ। इसमें प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों और मंत्री के अलावा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों ने भाग लिया। पहले दिन छह सत्र चले। इनमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। भ्रूण हत्या को सामाजिक अपराध करार देते हुए इसे रोकने के लिए महासंघ के लोगों से आगे आने का आह्वान किया गया।
सम्मेलन में पहले दिन जिन छह प्रस्तावों को पारित किया गया उन्हें बैठक में सदस्यों के समक्ष रखा गया। हर प्रस्ताव पर छह लोगों ने अपने विचार रखे। उसके बाद उसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। सबसे पहले सदस्यों का परिचय हुआ। सभी ने अपना परिचय देने के साथ ही दायित्वों के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि कौन कितने, समय से संगठन से जुड़ा है। भ्रूण हत्या से जुड़े दूसरे प्रस्ताव पर भी सदस्यों ने अपने विचार रखे। इसके विरुद्ध अभियान चलाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में योग पर भी प्रस्ताव लाया गया। इसपर सदस्यों ने कहा कि योग आज पूरी दुनिया में फैल गया है। प्रधानमंत्री के प्रयास से विश्व योग दिवस मनाया जाने लगा है। सम्मेलन में धर्मांतरण पर भी चर्चा की गई। इसे एक गंभीर समस्या बताते हुए वक्ताओं ने इसके विरुद्ध सचेत रहने की जरूरत जताई। यही नहीं, गुलामी का एहसास कराने वाले नामों को बदलने का प्रस्ताव भी बैठक में लाया गया।
सदस्यों का कहना था कि आजादी के इतने साल बाद भी तमाम सड़कों और प्रमुख स्मारकों का नाम उनके नाम पर रखा गया है जिन्होंने जुर्म किया था। अंत में सामाजिक समरसता पर चर्चा हुई। बताया गया कि सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए ही ब्रह्मलीन पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने डोम के घर भोजन किया था। शनिवार को सम्मेलन का समापन होगा। पहले दिन अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष भिखारी प्रजापति और संचालन ओमप्रकाश यादव ने किया।