उमस भरी गर्मी में लोग बादलों की ओर टकटकी लगाए हैं। किसान तो इंद्रदेव को मनाने के लिए जतन भी करने लगे हैं ताकि धान की रोपाई कर सकें, लेकिन गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में छाने के बाद भी बादल बिना बरसे निकल जा रहे हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान भी गलत साबित हो रहा है। इस बार बेहतर मानसून का दावा किया गया था, लेकिन पूर्वांचल के कई जिलों में जून से लेकर जुलाई के मध्य तक औसत से काफी कम वर्षा हुई। बस्ती मंडल के सात जिलों में से कई में तो औसत से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि मौसम विज्ञानियों की मानें तो बादल बरसेंगे, अभी इसकी गुंजाइश है।
इस बार मौसम विभाग ने बेहतर मानसून की संभावना जताई थी, मगर गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात में से चार जिलों (गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर) में एक जून से लेकर 12 जुलाई के बीच औसत से काफी कम बारिश हुई। कुशीनगर और देवरिया में औसत से 50 प्रतिशत कम बारिश रिकार्ड की गई। मौसम की इस बेरुखी का सीधा असर धान की रोपाई पर पड़ रहा है। काफी संख्या में किसानों ने नलकूपों के सहारे रोपाई शुरू कर दी है।
गोरखपुर के पश्चिम ओर 50 किलोमीटर के रेडियस में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन पूर्व की तरफ कम। बारिश का जो अनुमान था कि उसके मुकाबले यह काफी कम है। इसे क्लाइमेट चेंज का असर भी कहा जा सकता है। हालांकि फिर से हिमालय की तरफ कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। ऐसे में अच्छी बारिश की संभावना भी बन रही है।
- कैलाश पांडेय, मौसम विज्ञानी
जिले बारिश हुई औसत बारिश अंतर
गोरखपुर 174.1 305.3 - 43 प्रतिशत
देवरिया 68 253 -73 प्रतिशत
महराजगंज 266.8 352.8 -24 प्रतिशत
कुशीनगर 75 333.3 -77 प्रतिशत
बस्ती 284.1 243.5 17 प्रतिशत
सिद्धार्थनगर 285.1 270.2 5 प्रतिशत
संतकबीरनगर 384 267.6 24 प्रतिशत