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सब्सिडी, कृषि आधारित उद्योगों की किसानों की बजट से अपेक्षा

Wed, 24 Feb 2016 01:58 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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बजट से आम आदमी, नौकरीपेशा, उद्योग समेत तमाम सेक्टर के लोगों को जहां कई अपेक्षाएं हैं वहीं खेती-किसानी से जुड़े लोगों ने भी कई उम्मीदें लगा रखी हैं। उन्हें न सिर्फ कृषि ऋण में राहत की उम्मीद है बल्कि कृषि कार्य से जुड़ी तमाम चीजें खाद, बीज, बिजली आदि में सब्सिडी की भी अपेक्षा है।
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कृषि आधार उद्योगों को बढ़ावा मिले
भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसके बावजूद बजट में किसानों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती है। सामान्य तौर पर किसानों को खेती करने के लिए जितनी पूंजी की आवश्यकता होती है, उसकी पूर्ति खेती से होने वाली उपज से नहीं हो पाती। ऐसे में बिना कर्ज लिए खेती कर पाना किसानों के लिए संभव नहीं है, लेकिन सरकार की गलत नीतियों से कर्ज की अदायगी न होने पर किसान आत्महत्या तक कर लेते हैं। नकदी फसल कहे जाने वाली गन्ना की कीमत भुगतान करने में देरी की वजह से किसानों के सामने विकट स्थिति हो जाती है। किसानों को ध्यान में रखते हुए बजट में विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए। कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना के साथ ही कृषि यंत्रों पर अनुदान को बढ़ाया जाना चाहिए। ट्रैक्टर पर भी अनुदान देने की व्यवस्था होनी चाहिए। समर्थन मूल्य के साथ साथ किसानों को बोनस दिया जाए तभी उन्हें खुशहाली मिलेगी।
- उमाशंकर पांडेय, किसान, कैंपियरगंज

किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा बढ़ाई जाए
किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी पूंजी को लेकर होती है। अधिकांश किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन महंगे ब्याज दर की वजह से उनके एि कर्ज लौटा पाना मुश्किल हो जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा प्रति एकड़ काफी कम है। इसे कम से कम दो लाख रुपये किया जाए। साथ ही ऋण ब्याज मुक्त किया जाए। ऐसा कई अन्य प्रदेशों में हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा में इस तरह की सुविधा देने से किसानों को काफी राहत है। प्रदेश एवं केंद्र सरकार को चाहिए कि आर्थिक सहायता दिए जाने के मामले में भी एकरूपता रखी जाए। इससे छोटे-बड़े सभी किसानों को नुकसान होता है। जैसे ओलावृष्टि, सूखा आदि से फसलों के नुकसान में अपने बजट में अलग से व्यवस्था करके राहत पहुंचाई जाए।
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- संगम द्विवेदी, किसान, खजुरगावां

इंश्योरेंस की राशि तत्काल उपलब्ध कराने का प्रावधान हो
आज के समय में भी खेती किसानी पूरी तरह से भगवान पर निर्भर है। अगर अतिवृष्टि, अनावृष्टि या फिर अन्य किसी वजह से फसल बर्बाद हो जाती है कि इंश्योरेंस होने के बावजूद किसानों को इसका लाभ समय से नहीं मिल पाता है। बजट में सरकार को इस बात का भरोसा दिलाना चाहिए कि अगर किसी वजह से फसल खराब होती है तो हम आपकी सहायता के लिए पूरी तरह से खड़े हैं। इसके साथ ही बजट में न सिर्फ खेती के लिए बल्कि किसानों के लिए विशेष दर्जा देते हुए प्रावधान किया जाना चाहिए। खाद, बीज रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाए। सिंचाई के लिए मुकम्मल व्यवस्था की जाए। फसल क्षतिपूर्ति की तत्काल व्यवस्था की जाए। क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने की बजाए किसानों के घर से फसल खरीदने की व्यवस्था होनी चाहिए।
-चंद्रभान मिश्र, किसान, बड़हलगंज

एक्सपर्ट कमेंट
घोषित योजनाओं के क्रियान्वयन का ठोस उपाय हो
इस समय जीडीपी का लगभग 60 प्रतिशत सेवा क्षेत्र से आता है। इसके बाद उद्योग एवं कृषि से। इसलिए बजट में सेवा क्षेत्र को लेकर विशेष प्रावधान किया जाना बहुत जरूरी है। उद्योगों की बेहतरी के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट दी जानी चाहिए। इससे न सिर्फ नए उद्योग स्थापित होंगे बल्कि औद्योगिक सेक्टर को काफी गति मिलेगी। इन दोनों सेक्टर को लेकर बजट में किए गए प्रावधान का कुछ ही समय में पता चल जाता है, लेकिन कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं का फीडबैक नहीं मिल पाता है। इसे लेकर सरकार भी उतनी गंभीर नहीं रहती है। अगर पिछली बजट की घोषणाओं को ही सरकार सही ढंग से लागू करने की व्यवस्था कर दे तो बिना किसी नई घोषणाओं के ही किसानों को काफी राहत दी जा सकती है। ऐसे में सरकार को अपनी तमाम घोषणाओं को सही ढंग से लागू करने के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। सरकार को चाहिए कि किसानों की समस्याओं को आम आदमी की समस्याओं से अलग देखे। इंश्योरेंस बीमा का तत्काल लाभ दिलाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
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- डॉ. संदीप कुमार, शिक्षक अर्थशास्त्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय
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