प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमीन पर फेल होती दिख रही है। गोरखपुर मंडल के चार जिलों में एक मई 2016 से अब तक पांच लाख से अधिक गरीबों को मुफ्त में कनेक्शन के साथ रसोई गैस और चूल्हे दिए गए । मगर अब ये कनेक्शन आयल कंपनियों के साथ ही डिस्ट्रीब्यूटर्स के भी गले की फांस बन गई है। गैस, चूल्हा मुहैया कराने के बाद करीब 60 फीसदी गरीबों के घर से सिलेंडर, भरने के लिए दोबारा एजेंसी ही नहीं आ रहे हैं। इन घरों के चूल्हे दोबारा या तो लकड़ी से जल रहे हैं या फिर उन्होंने कोई और विकल्प अपना लिया है।
यही नहीं विधानसभा चुनाव 2017 के पहले ज्यादा से ज्यादा गरीबों को उज्ज्वला योजना का लाभ देने के दबाव में कनेक्शन देने में भी भारी चूक हुई। एक ही घर में दो से अधिक कनेक्शन दे दिए गए तो कुछ ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ दे दिया गया जो पात्र नहीं थे। चुनाव का दबाव खत्म होने के बाद जब आयल कंपनियों ने कनेक्शनों की जांच शुरू कराई तो इसका खुलासा हुआ। नतीजतन अब कंपनियां इस नुकसान की भरपाई डिस्ट्रीब्यूटर से कर रही हैं। कई डिस्ट्रीब्यूटर को नोटिस देकर उनसे फर्जी कनेक्शनों पर आए खर्च के एवज में लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन (एचपीसी) ने कार्रवाई शुरू कर दी है तो इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन (बीपीसी) वसूली की तैयारी कर रहा है। आयल कंपनियों ने ऐसे कनेक्शनों को दो श्रेणी में बांटा है एक नल कनेक्शन और दूसरा मल्टीपल कनेक्शन ।
नल कनेक्शन: योजना के तहत घर के एक सदस्य को ही कनेक्शन दिया जाना है। एक ही घर में अगर कई सदस्य है तो सभी को एक ही टिन नंबर जारी किया गया। पात्रों की जो सूची बनी उसमें मिस प्रिंट होने की वजह से कई टिन के सामने पात्रों के नाम ही नहीं छप पाए। दबाव में टार्गेट पूरा करने के लिए कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने उसके सामने ऐसे लोगों के नाम दर्ज कर कनेक्शन बांट दिए, जो पात्र नहीं है। आयल कंपनियों ने इसे नल कनेक्शन की संज्ञा दी है।
मल्टीपल कनेक्शन: परिवार के एक ही सदस्य को गैस का कनेक्शन देने का प्रावधान है मगर कई परिवारों के सदस्यों ने एक ही टिन पर अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर्स से कनेक्शन ले लिए। इसे मल्टीपल कनेक्शन का नाम दिया गया।
लोन के विकल्प ने लगाया चूना
गरीबों को गैस क नेक्शन देने के लिए दो प्रावधान किए गए थे। कनेक्शन का आधा खर्च गरीबों को उठाना होता है और आधा आयल कंपनियों को। चूल्हा, सिलेंडर समेत कनेक्शन का चार्ज 3200 से 3500 रुपये है। वैसे इसका निर्धारण लागू दर के हिसाब से होता है। पहले प्रावधान के तहत आधा खर्च यानी करीब 1600 रुपये जमा कर कनेक्शन लिया जा सकता है या फिर दूसरे प्रावधान के तहत लोन पर बिना एक भी रुपया जमा किए कनेक्शन लिया जा सकता है। इस दशा में उपभोक्ता के हिस्से का खर्च सब्सिडी के तौर पर आयल कंपनियां काट लेती हैं। ज्यादातर गरीबों ने लोन पर कनेक्शन लिए। अब जबकि तमाम लाभार्थी दोबारा सिलेंडर ही नहीं भरवाने आ रहे तो आयल कंपनियाें को अपनी बड़ी रकम डूबने का भय सताने लगा है।
दोबारा सिलेंडर न भरवाने की प्रमुख वजह
उज्ज्वला योजना के ज्यादातर कनेक्शन ग्रामीण इलाकों में दिए गए हैं, जहां अभी भी चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी आदि का विकल्प मौजूद है
लाभार्थियों के आस-पास के लोग सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए खुद के कनेक्शन पर सिलेंडर भरवा दे रहे
ऑयल कंपनियों की तरफ से व्यापक प्रचार, प्रसार और मानीटरिंग का अभाव
ऑयल कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स में ठनी
गोरखपुर। उज्ज्वला योजना के तहत बांटे गए फर्जी कनेक्शन को लेकर आयल कंपनियों की सख्ती से उनके और डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच ठन गई है। नाम न छापने की शर्त पर गोरखपुर के दो डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि आयल कंपनियां तानाशाही रवैया अपना रही हैं। कोई भी कनेक्शन बिना आयल कंपनियों की स्वीकृति के नहीं जारी किया जाता है। ऐसे में वे पूरा दोष सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर्स के माथे कैसे मढ़ सकती हैं।
यह सच है कि उज्ज्वला योजना के तहत जितने कनेक्शन बांटे गए उनमें से तमाम लोग दोबारा सिलेंडर नहीं भरवाने आ रहे हैं। आयल कंपनियां इसपर मंथन कर रही हैं कि कैसे उन्हें दोबारा प्रोत्साहित किया जाए। अब पहले की तुलना में सिलेंडर के दाम भी कम हुए है। उम्मीद है कि लोगों की संख्या बढ़ेगी।
- शिवेंद्र जायसवाल, नोडल, उज्जवला योजना व असिस्टेंट एरिया मैनेजर, आईओसी
जिला कनेक्शन
गोरखपुर 1.32 लाख
देवरिया 99 हजार
महराजगंज 90 हजार
कुशीनगर 1.75 लाख
(उज्ज्वला योजना के तहत यूपी के 44 जिलों में करीब 39 लाख कनेक्शन बंटे)
केस 1
पहले मुफ्त में कनेक्शन देने की घोषणा की गई। फार्म भर दिया तो पता चला कि कनेक्शन का आधा खर्च खुद उठाना पड़ेगा। किसी तरह रुपये का इंतजाम कर कनेक्शन, सिलेंडर और चूल्हा ले लिया। एक महीने तक उसी पर खाना बना। मगर जब सिलेंडर खत्म हो गया तो उसे दोबारा भरवाने के लिए महीनों रुपये नहीं जुटा पाया। मजदूरी करके घर का खर्च चलाते हैं ऐसे में एकमुश्त सात, आठ सौ रुपया सिलेंडर पर खर्च कर पाना मुमकिन नहीं है। घर वालों के दबाव पर किसी तरह एक बार और सिलेंडर भरवाने की हिम्मत जुटा पाए थे।
- सरन गौड़, बढ़या, जंगल कौड़िया
केस 2
दो महीने तक पहला सिलेंडर चला था। शुरू में तो बहुत अच्छा लगा मगर जब सिलेंडर भरवाने की बारी आई तो मालूम चला कि काफी पैसा लगेगा। तब से छह महीने से अधिक का समय हो गया लकड़ी पर ही खाना बन रहा है। गेहूं बेचने के बाद रुपया मिला तो दोबारा किसी तरह सिलेंडर भरवाया मगर उसपर खाना नहीं बनाते। सोच रखा है कि मेहमान आने या फिर त्यौहार पर ही सिलेंडर पर खाना बनेगा।
- सावित्री, लक्ष्मीपुर, कैंपियरगंज
केस 3
बिना पैसे का सिलेंडर और चूल्हा तो मिल गया। मगर जब सिलेंडर खत्म हुआ तो उसे भराने के लिए पैसे नहीं जुटा पाए। मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलता है। अब सात सौ रुपये का सिलेंडर ही भरवा लेंगे तो दूसरे खर्च कैसे चलेंगे। सरकार कहीं थी सब्सिडी मिलेगी मगर पहले सिलेंडर का वो भी नहीं मिला।
- सुखा देवी, मरवट, बड़हलगंज
केस 4
जब कनेक्शन मिल रहा था तो लगा कि हर महीने सिलेंडर के भी रुपये नहीं देने पड़ेंगे। मगर जब पहला सिलेंडर खत्म हुआ तब मालूम चला कि उसे भराने में आठ सौ रुपये खर्च होंगे। तभी से लकड़ी पर खाना बन रहा है।
- सायरा खातून, गोला
केस 5
पति और बच्चे जो कमाते हैं वह घर चलाने के लिए ही कम पड़ जाता है। इतना पैसा नहीं हो पाया कि दोबारा सिलेंडर भरवाया जा सके । इसलिए फिर से लकड़ी पर खाना बनाने लगे- मुरता देवी, गोड़सरी, बांसगांव
केस 6
शुरूआत में किसी तरह दो, तीन बार सिलेंडर भरवाया था मगर अब भारी पड़ने लगा है। उतना नहीं कमाते कि हर महीने सिलेंडर भरवा सके इसलिए भरवाना छोड़ दिया।
- राजपति देवी, बांसगांव