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चावल पर गायत्री मंत्र, दाल पर मोदी-ओबामा

Mon, 15 Jan 2018 11:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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दाल पर बनाई कलाकृतियों और हनुमान चालीसा के साथ राजकुमार वर्मा। - फोटो : Amar Ujala
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कला, संस्कृति, खेलकूद के साथ ही अनूठी कलाओं को भी गोरखपुर महोत्सव में मंच मिला है। इसमें माइक्रो पेंटिंग के क्षेत्र में कई मंचों पर कला की छाप छोड़ चुके यश भारती से सम्मानित राजकुमार वर्मा की कई कलाएं महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हैं। चावल के एक दाने पर गायत्री मंत्र, विष्णु का चतुर्भुज रंगीन स्वरूप और 550 अक्षर लिखकर जहां लोगों में कौतूहल का विषय बने हैं। वहीं दाल पर बनी पीएम मोदी, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, छात्रपति शिवाजी, गुरुनानक देव की माइक्रो पेंटिंग शहरवासियों को लुभा रही हैं।
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गोरखपुर के हांसूपुर स्थित बसंतपुर मोहल्ला निवासी राजकुमार 60 साल की उम्र में भी नंगी आंखों से माइक्रो पेंटिंग आसानी से बना लेते हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि पहले वह घड़ी मरम्मत का काम करते थे। इस दौरान उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कभी वह इस मुकाम पर पहुंचेंगे। टाउनहाल में 40 साल पहले किसी को दाल पर चित्र बनाने की कोशिश करते देखा। प्रयास तो असफल हुआ, मगर उन्हें प्रेरणा दे गया।

साल भर के कठिन प्रयास के बाद उन्होंने दाल पर गुरुनानक देव और रविंद्रनाथ टैगोर के चित्र बनाए। सफलता मिली तो पूरे मनोयोग से माइक्रो पेंटिंग में जुट गए। तब से लेकर आजतक कई राजनीतिक हस्तियों, बॉलीवुड कलाकारों के साथ महापुरुषों की पेंटिंग बना चुके हैं। उनके प्रयासों को देखते हुए सरकार ने उन्हें यश भारती से सम्मानित किया है। भले ही उनकी पेंटिंग को राष्ट्रीय स्तर पर या गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शोहरत ना मिली हो, मगर लोगों का संतोष ही उनके लिए सच्चा सम्मान है।
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उपलब्धियां
एक और डेढ़ सेंटीमीटर की सचित्र हनुमान चालीसा
एक सेंटीमीटर की मुस्लिम ग्रंथ पवित्र दरुद शरीफ
एक तिल पर इंडिया शब्द 155 बार लिखा
रामदाने पर भगवान बुद्ध का चित्रण
छोटा रंगीन कैलेंडर 
विजिटिंग कार्ड की एक तरफ 15000 अक्षर
डाक टिकट पर रामदरबार

डेढ़ लाख की है हनुमान चालीसा और दरुद शरीफ
राजकुमार ने बताया की डेढ़ सेंटीमीटर की हनुमान चालीसा लखनऊ के शिल्प महोत्सव में एक लाख रुपये में बिकी है। वहीं एक सेंटीमीटर के हनुमान चालीसा की कीमत डेढ़ लाख और दरुद शरीफ की कीमत डेढ़ लाख रुपये निर्धारित है। भविष्य में अपनी रचनाओं को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराएंगे। इसके लिए बातचीत चल रही है।

माइक्रो पेंटिंग का सिखाते हैं गुर
कला का कभी अंत नहीं होता। इसे मानने वाले राजकुमार विकास आयुुक्त कार्यालय सेवा केंद्र वाराणसी के मार्गदर्शन पर घर पर युवाओं को चार महीने की ट्रेनिंग देते हैं। उनसे प्रशिक्षण हासिल करने वाली छात्रा कोमल शर्मा और पायल वर्मा ने बताया कि पेंटिंग का बचपन से शौक था, मगर यह रोजगारपरक कैसे बने, इसके टिप्स माइक्रो पेंटिंग के क्षेत्र में उतरने के बाद मिले हैं।
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