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हर घर की बेटी हो गई नीलम, सबने दिया सहयोग, शादी वाले घर में आगजनी से सब कुछ हो गया था तबाह

Sun, 26 May 2019 03:51 AM IST
देव कश्यप बेचन राय, अमर उजाला, बघौली (संतकबीरनगर)
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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गांवों में अभी भी आत्मीयता बाकी है। ऐसा ही नजीर पेश किया बघौली क्षेत्र के करैली गांव के लोगों ने। शुक्रवार को इस गांव के एक घर में आग लगने से सब कुछ तबाह हो गया। यह आग तब लगी जब बेटी की शादी के लिए मिठाई बनाया जा रहा था। आग से शादी का सारा सामान जलकर राख हो गया। लेकिन कुछ ही घंटों में गांव के लोगों ने दुबारा सारी तैयारी करके मानवता, संवेदना और दरियादिली का उदाहरण प्रस्तुत किया।

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करैली गांव निवासी राममिलन गुप्ता की बेटी नीलम की शादी खलीलाबाद के उस्का गांव निवासी सुभाष के बेटे से तय हुई है। शनिवार को शादी थी जिसके लिए शुक्रवार की शाम को राममिलन के घर मिठाई बन रहा था। इसी दौरान गैस सिलिंडर के पाइप में लीकेज के चलते आग लग गई जिसमें राममिलन की झोपड़ी और उसमें रखा शादी का सारा सामान जल गया। घर के लोग इसी चिंता में थे कि अब बेटी की शादी किस तरह होगी।

परंतु गांव के लोगों ने राममिलन को ढांढस बंधाया और रात में ही लोग सामान की व्यवस्था करने में लग गए। सुबह गांव के बिक्कू पाठक, चंद्रशेखर, पूर्व प्रधान गुड्डू सिंह, वर्तमान प्रधान मुन्ना, कोटेदार धर्मदेव, बबलू यादव, सुनील यादव, ईश्वर यादव आदि ने झोपड़ी जलने वाले स्थान की सफाई की और वहां बाहर से मिट्टी लाकर जगह को साफ-सुथरा बनाया। कुछ ही देर में पूरा गांव इस परिवार की मदद को जुट गया। टेंट हाउस वाले ने बिना रकम लिए ही टेंट-कुर्सी लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया। रिश्तेदारों व गांव वालों ने सहयोग से जुटाई गई रकम से शादी के सारे सामान दुबारा खरीदे गए। बरातियों के नाश्ता-भोजन समेत सभी तैयारियां शाम से पहले ही पूरी हो गई थी। गांव के लोगों का कहना था कि नीलम की शादी में किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होनी चाहिए। गांव का हर परिवार बेटी की शादी के लिए प्रयास में जुटा रहा।
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वर पक्ष ने भी दिखाई दरियादिली
रिश्ते की शुरूआत से पहले ही रिश्तेदार पर आई विपत्ति में नए रिश्तेदार ने भी आगे बढ़कर साथ दिया। लड़के के पिता सुभाष ने लड़की के पिता राममिलन को न सिर्फ सांत्वना दी बल्कि बिना किसी तड़क-भड़क के शादी की सभी रस्में पूरी कराने की बात कही। गांव और रिश्तेदारों की इस दरियादिली से भावुक राममिलन का कहना था कि ऐसा गांव और रिश्तेदार जिसे मिले उसे कोई तकलीफ हो ही नहीं सकती।

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