अलविदा की नमाज के बाद ईद को लेकर लोगों की तैयारी तेज हो गई है। हर किसी की कोशिश इस बार ईद में कुछ अलग और खास दिखने की है। यही वजह है कि लोगों का ध्यान सिर्फ कपड़े तक ही सीमित नहीं है बल्कि टोपी और रुमाल को लेकर भी वे उतने ही संजीदा हैं। बाजारों में अपनी इसी पसंद को तलाशती आंखें इसकी संजीदगी की तस्दीक कर रही हैं। महिलाओं में तो इसे लेकर उत्साह है ही, पुरुष भी समझौते के मूड में नहीं हैं। महिलाओं व पुरुषों के रुझान की बानगी कुछ यूं सामने आई।
सुल्तान के कुर्ते और मस्तानी सूट की धूम
पुरुषों का कुर्ता हो या महिलाओं का सूट, सब पर फिल्मी फैशन का जोर है। पुरुष जहां सुल्तान और दबंग स्टाइल के कुर्ते तलाशते नजर आ रहे हैं वहीं महिलाओं को बाजीराव मस्तानी फिल्म का मस्तानी सूट लुभा रहा है। बच्चे भी इस तैयारी में पीछे नहीं है। लड़के बैलून पतलून खरीदने की जिद में हैं तो लड़कियाें की डिमांड प्लाजो यानी घेरेदार सूट है। शाहमारूफ में लंबे समय से कुर्ते के व्यवसाय से जुड़े मोहम्मद अफजल बताते हैं कि वे अब तक काफी तादाद में सुल्तान और दबंग कुर्ते बेच चुके हैं। लखनवी गोला और इंडो-वेस्टर्न कुर्ते की भी काफी डिमांड है। हालांकि गर्मी को देखते हुए चिकन के कुर्तें की शिद्दत की मांग से भी उनका इनकार नहीं है। उनका कहना है चिकन की बहार से भला किसी को कैसे इनकार हो सकता है। बुजुर्गवारों की तो यह पहली पसंद है, युवा भी इससे इत्तेफाक रखते हैं।
रेतीचौक के लेडीज सूट व्यवसायी फज़ल इब्राहीम का कहना है कि वे अब तक तीन दर्जन से ज्यादा मस्तानी सूट बेच चुके हैं। शाही अंदाज के इस सूट को हर उम्र की महिलाएं पसंद कर रही हैं। इसके अलावा कॉटन कराची, लांग नेट के सूट की भी काफी मांग है, लेकिन इन सबके बीच फज़ल यह भी मानते हैं कि गर्मी की वजह से ज्यादा लोग सूट पर कम पैसा लगाना चाह रहे हैं, ऐसे में सस्ते सूट की बिक्री ज्यादा है। कढ़ाई वाले के बजाय सादे सूट ज्यादा बिक रहे हैं। हालांकि फज़ल ईद पर सस्ते सूट की खरीदारी के पीछे वैवाहिक लग्न का न होना भी वजह मानते हैं। उनका कहना कि लग्न न होने से लोग सूट पर लंबा पैसा फंसाने से कतरा रहे हैं।
इंडोनेशियाई टोपी पर जंचेगी अरबी रुमाल
रमजान और फिर ईद में खुदा की इबादत की बात आए और टोपी और रुमाल का जिक्र न हो, यह हो ही नहीं सकता। टोपियों और रुमाल के बाजार में ईद को देखते हुए चहल-पहल बढ़ गई है। टोपियों की मांग के मद्देनजर स्थाई के अलावा कई अस्थाई दुकानदारों ने भी सड़क पर डेरा जमा लिया है। टोपी से चोली-दामन का साथ रखने वाली रुमाल भी इन दुकानों पर अपना वजूद पूरी मजबूती से बनाए हुए है। ईद की तैयारियों के मद्देनजर जब टोपी और रुमाल के व्यवसायी मोहम्मद अख्तर आलम से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि युवाओं की पहली पसंद इंडोनेशियाई टोपी है, जिसे उन्होंने सबसे ज्यादा बेचा है। इसके अलावा बरकाती, देवबंदी, अवैसी, रामपुरी, तुर्की, पंचकली, बांग्लादेशी टोपी की भी भरपूर डिमांड है। बच्चों को चांद-तारे, गोटे वाली चमकती टोपियां ज्यादा भा रही है। वे उसे खरीदने की जिद भी कर रहे हैं।