कर्मचारियों के भविष्य निधि का अंश नहीं जमा करने पर एफसीआई और सरैया चीनी मिल समेत 12 जिलों के 41 फर्म से करीब सवा करोड़ रुपये की वसूली की गई है। नोटिस के बाद भी रकम नहीं जमा करने पर कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय ने इन सभी फर्म के बैंक खातों को सीज कर उसमें से बकाए की रकम वसूली।
एफसीआई की देनदारी को लेकर खाता सीज कर रकम निकालने के लिए गोंडा एसबीआई के ब्रांच मैनेजर को महकमे ने पत्र लिखा था। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न करने पर विभाग ने उन्हें भी डीम्ड डिफाल्टर का नोटिस थमा दिया और रकम न निकालने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद हरकत में आए ब्रांच मैनेजर ने एफसीआई का खाता सीज कर उसमें से रकम निकाल कर पीएफ महकमे को मुहैया कराया।
समय से कर्मचारियों के पीएफ की रकम नहीं जमा करने पर एफसीआई से 43.06 लाख जुर्माना और ब्याज के तौर पर 20.08 लाख यानी कुल 63 लाख रुपये वसूले गए। इसी तरह जनवरी 2012 से मई 2012 तक के बकाये के तौर पर सरैया चीनी मिल से 46.62 लाख रुपये वसूले गए।
इन बड़े बकाएदारों से भी हुई वसूली
- विद्युत मजदूर कल्याण समिति- 8.03 लाख रुपये
- उदय मेडिसिन सेंटर- 2.40 लाख रुपये
- पूर्वांचल ग्रामीण संस्थान- 2.17 लाख रुपये
- सरस्वती शिशु मंदिर, राप्तीनगर- 1.59 लाख रुपये
- प्यारी देवी रचित महाविद्यालय- 37 हजार रुपये
समय पर कर्मचारियों का भविष्य निधि नहीं जमा करने वालों पर कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 14 बी और सात क्यू के तहत क्रमश: जुर्माना और ब्याज की कार्रवाई की जाती है। रक म का निर्धारण होने के बाद सभी को उसे जमा करने की मोहलत दी गई थी। मियाद बीतने के बाद भी जब इन फर्मों ने रुपये नहीं जमा किए तो उनके खाते से बकाया, जुर्माना और ब्याज की रकम निकाली गई, जिसे कर्मचारियों के खाते में भेज दी जाएगी।
- वीवीबी सिंह, पीएफ कमिश्नर