गोरखपुर। बजट के अभाव में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमरा गई है। पहले एक्स-रे प्लेट का टोटा हुआ तो अब कॉलेज के सेंट्रल दवा स्टोर में विशेष दवाएं तो दूर दर्द और बुखार की दवा भी खत्म हो गई है।
स्थिति यह है कि मरीजों के तीमारदारों को दवाओं की खरीद के लिए कॉलेज कर्मचारी बेहिचक बाहर की राह दिखा रहे हैं। मजबूर लोगों के पास इंतजाम को कोसने के अलावा कोई चारा नहीं है।
यही स्थिति सर्जिकल सामानों की भी है। इनमें आईवी सेट, कैथेडर, डिप-सेट, सिरिंज और लीकोप्लास्ट जैसे जरूरी सामान भी खत्म हो गए हैं। नतीजा यह है कि ऑपरेशन के लिए पूरा का पूरा सामान बाहर की दुकानों से खरीदने को तीमारदार मजबूर हैं, चाहे वह दवा हो या फिर सर्जरी का सामान।
तीमारदार जब इसे लेकर पूछताछ कर रहे हैं तोे कर्मचारी झल्ला रहे हैं। स्थिति यह है कि सस्ती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में मौजूद गार्जियन मेडिकल स्टोर पर पहले इक्का-दुक्का तीमारदार ही नजर आते थे, अब वहां बाकायदा नंबर लगाया जा रहा है। कॉलेज सूत्रों के मुताबिक यदि जल्द से जल्द दवाओं की नई खेप नहीं आई तो सप्ताह भर में पूरा स्टोर खाली हो जाएगा।
उधर इस स्थिति का दलाल खूब फायदा उठा रहे हैं। कॉलेज में उनकी आमद खुलेआम हो गई है। खुद की मजबूरी के चलते कॉलेज प्रशासन उनके खेल को अनदेखा कर रहा है।
नहीं आईं एक्स-रे प्लेटें, परेशान रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज में रविवार से हुआ एक्स-रे प्लेटों का टोटा मंगलवार को भी बना रहा। पूरे दिन मरीज परेशान रहे। कॉलेज में मौजूद एक डिजिटल एक्स-रे मशीन ने कुछ लोगों को राहत जरूर दी लेकिन वहां की भीड़ ने बहुत से मरीजों को बाहर जाने के लिए मजबूर किया। गरीब मरीज डिजिटल मशीन का चार्ज अधिक होने के चलते बिना एक्स-रे कराए ही लौट गए। उधर, कॉलेज प्रशासन पूरे दिन इस बात का दिलासा देता रहा कि प्लेटों के लिए ऑर्डर किया गया है और किसी भी पल वह प्लेटें कॉलेज में आ सकती हैं लेकिन देर शाम तक प्लेटें कॉलेज तक नहीं पहुंच सकीं।
अभी तक कोई दवा नहीं मिली
दो दिन से गांव के ही एक व्यक्ति को लेकर अस्पताल में हूं। वार्ड नंबर 14 में उनका इलाज चल रहा है। जहां तक दवा का सवाल है तो कॉलेज से अभी तक एक भी दवा नहीं मिली। सारी दवाएं बाहर से खरीदी हैं।
जितेंद्र निषाद, खुटहन, गोरखपुर
अब तो उम्मीद ही छोड़ दी है
चाचा के इलाज के लिए पिछले छह महीने से मेडिसिन विभाग के ओपीडी के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन आज तक ओपीडी में लिखी दवा स्टोर से नहीं मिल सकी है। अब तो मैंने यहां से दवा की उम्मीद ही छोड़ दी है।
अखिलेश तिवारी, नेबुआ नौरंगिया, कुशीनगर
बजट के अभाव में दवा खरीद नहीं हो सकी है। इसके लिए शासन को लिखा गया है। मंजूरी मिलते ही दवा और सर्जिकल सामानों की खरीद कर ली जाएगी। फिलहाल तो इसे लेकर दिक्कत है ही।
डॉ. राजकिशोर सिंह, प्रभारी एसआईसी, नेहरू चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज