हाईकोर्ट का स्थगन आदेश हटते ही शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरगर्मी अचानक बढ़ गई। चुनाव कराने का फैसला पहले ही दिन यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भारी पड़ता दिखा। बिना सहमति के चुनाव अधिकारी बनाने के फैसले को विधि विभाग के डीन प्रो. जितेंद्र तिवारी ने ठुकरा दिया। उन्होंने पत्र लिखकर जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन को लिखे पत्र में उन्होंने चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी न लेने के पीछे स्वास्थ्य, पहले से मिले प्रशासनिक दायित्व और तीन बार की सेवानिवृत्ति का हवाला दिया है। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कॉमर्स विभाग के प्रो. संजय बैजल को नया चुनाव अधिकारी बनाया है। प्रो. बैजल ने जिम्मेदारी निभाने के लिए अपनी रजामंदी भी दे दी है। कुलपति ने बताया कि प्रो. बैजल फिलहाल मुजफ्फरपुर में हैं। शनिवार दोपहर तक वह गोरखपुर आकर चुनाव अधिकारी का दायित्व ग्रहण कर लेंगे। बहुत जल्द चुनाव तिथि की घोषणा भी कर दी जाएगी।
लिंगदोह कमेटी की समय-सीमा हुई दरकिनार
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर समय-सीमा को लेकर जारी प्रदेश शासन का निर्देश गोरखपुर यूनिवर्सिटी के लिए बेमानी साबित हो रहा है। निर्देश के मुताबिक सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह के भीतर छात्रसंघ चुनाव संपन्न हो जाना चाहिए। इस पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन किया जाए तो सितंबर के पहले सप्ताह के समाप्त होते ही यह समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। ऐसे में बिना इस मुद्दे पर विचार किए यूनिवर्सिटी प्रशासन का चुनाव का फैसला लिंगदोह समिति की सिफारिशों को दरकिनार करने वाला है। इस संबंध में कुलपति का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर आ रही अड़चन खत्म होते ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, अब अगर समय-सीमा को लेकर कोई दिक्कत आती है तो उस पर बाद में विचार किया जाएगा।