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बाढ़ के बीच बाजार ‘सूखा’ 

Tue, 22 Aug 2017 01:16 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
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बाढ़ में डूबा गांव। - फोटो : Amar Ujala
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बाढ़ ने एक ओर जहां शहर के चारों ओर बसी आबादी का जनजीवन दुरूह कर दिया है, वहीं बाजार और व्यापार इसकी छाया से सहम गया है। दवा, फल-सब्जी, होटल-रेस्टोरेंट, कपड़ा, गहने, ट्रांसपोर्ट आदि क्षेत्रों से जुड़े व्यापारी और कामगार बाढ़ की विभीषिका के असर से परेशान हैं। पूर्वांचल में आई भयावह बाढ़ से शहर अन्य इलाकों से कट गया है। इसके चलते बाजार में ‘सूखा’ सा पड़ गया है। 
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दवा बाजार
सोमवारी जाम से जूझने वाले बेतियाहाता और भालोटिया मार्केट में इस सोमवार एक बार भी जाम के हालात नहीं बने। दवा विक्रेता संघ के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि बेतियाहाता और भालोटिया मंडी में दवाओं की खरीद-फरोख्त के लिए पूरे दिन दूर-दराज से ग्राहकों की आवाजाही रहती है, लेकिन इस सोमवार ग्राहक काफी कम आए। खुदरा व्यापार पर 50 फीसदी असर है। खुदरा बिक्री का असर थोक मंडी पर भी पड़ेगा।

कपड़ा व्यवसाय
थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष राजेश नेमानी बताते हैं कि बाढ़ से प्रमुख मार्गों के बंद हो जाने से न तो ग्राहक आ पा रहे हैैं और न ही माल। दुकानों पर बिक्री बेहद घट गई है। आलम यह है कि पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है। शहर में कपड़े का थोक व्यापार 10 से 12 करोड़ रुपये रोजाना के हिसाब से प्रभावित है। हालात न सुधरे तो कपड़ा व्यापारियों को बाढ़ से करारा नुकसान झेलना पड़ेगा।
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होटल-रेस्टोरेंट
शहर के होटल व्यवसायी अचिंत्य लाहिड़ी ने बताया कि यहां का होटल व्यवसाय कारपोरेट कस्टमर पर टिका है, लेकिन बाढ़ के चलते रास्ते बंद हैं। ऐसे में बाहरी लोग नहीं आ रहे। इससे 70 फीसदी तक रूम बुकिंग प्रभावित हुई है। बैक्वेंट और रेस्टोरेंट सेक्टर में भी 40 से 45 फीसदी तक गिरावट है। शहर के कुछ इलाकों और देहात क्षेत्रों की काफी संख्या में बुकिंग कैंसल हुई है, जबकि 16 अगस्त से व्यवसाय बेहतर होने की आस थी।

थमा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय
यूपी ट्रक संचालक एसोसिएशन के प्रदेश मीडिया प्रभारी विनोद दुबे ने बताया कि बाढ़ से जहां-तहां गाड़िया खड़ी हो गई हैं। शहर से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में माल नहीं जा पा रहा है। वहीं बिहार से बालू और मध्यप्रदेश से गिट्टी नहीं आ पा रही है। इससे ट्रांसपोर्टरों को तो झटका लगा ही है साथ ही बिल्डिंग मैटेरियल के दाम भी बढ़ गए हैं। एक तो खराब मौसम दूसरे ज्यादा दाम होने के कारण मजदूर और शटरिंग वाले बेकार हो गए हैं।

फंसे ग्वाले, दूध के लाले
शहर आकर दूध बेचने वाले ज्यादातर ग्वाले बाढ़ से यहां तक आ नहीं पा रहे हैं। इसके चलते शहर में दूध का संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में लोगों को दूध का पैकेट लेकर काम चलाना पड़ रहा है। जनरल स्टोर चलाने वाले सुरेश शर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में शाम तक जितना पैकेट दूध बेचता था वह सोमवार को सुबह ही खत्म हो गया। दूध के संकट के बीच छोटे बच्चों की भूख मिटाने की खातिर अभिभावकों को काफी मुश्किल झेलनी पड़ रही है।

फलों की आवक व मांग घटी
थोक फल व्यापारी गुलाब के मुताबिक बाढ़ के बीच लोगों का फलों से मोहभंग है। दूरदराज से शहर में आकर फलों की रेहड़ी लगाने वाले नहीं आ रहे। दूसरी ओर बाढ़ की आहट से सहमे शहरी भी फल की जगह अन्य जरूरी सामान जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं। मांग न होने से सेब का रेट 50-60 त्र हो गया है। मौसमी फल आसपास के गांवों के डूब जाने के चलते शहर नहीं आ पा रहे हैं। फल का कारोबार पूरी तरह से बाढ़ से प्रभावित हो गया है।

हरी सब्जियाें के चढ़े भाव
सब्जी व्यापारी मुश्ताक अहमद ने बताया कि बाढ़ के चलते शहर में हरी सब्जियों के भाव बढ़ गए हैं। देहात क्षेत्र से आने वाली हरी सब्जियां बाढ़ में डूब चुकी हैं। बाहर से हरी सब्जियां आ रही हैं लेकिन ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने के चलते दाम करीब दोगुना हो गया है। लोग आलू-प्याज खरीद रहे हैं। आलू का रेट दो रुपये प्रति किलो बढ़ा है, लेकिन प्याज की कीमतें नहीं बढ़ी हैं। हालांकि, कुल मिलाकर बाढ़ के चलते बाजार मंदा हो गया है।
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