क्रिसमस ट्री सजाकर प्रभु यीशु का जन्म मनाने के चलन पर भी नोटबंदी की मार पड़ी है। नर्सरी में एरोकेरिया के पौधों की इस बार बिक्री भी कम हुई है वहीं कृत्रिम क्रिसमस ट्री का बाजार भी ठंडा है। क्रिसमस ट्री बेचने वाले दुकानदार से लेकर इन्हें खरीदने वाले मसीही समाज के लोग इसके पीछे नोटबंदी को कारण बता रहे हैं।
मोहद्दीपुर में नर्सरी चलाने वाले चंचल पाल ने बताया कि इस बार क्रिसमस ट्री के तौर पर सजाया जाने वाला एरोकेरिया का पौधा पिछले साल के मुकाबले काफी कम बिका। पिछले साल की तुलना में इस बार 75 से 80 फीसदी तक बिक्री प्रभावित हुई है। लोगों के पास रकम कम है। ऐसे में लोग पहले अन्य खर्चे निपटा रहे हैं, बाद में क्रिसमस ट्री के बारे में सोच रहे हैं। रोज एक-दो पौधे ही बेच पा रहा हूं। कृत्रिम क्रिसमस ट्री बेच रहे इंदिरा बाल विहार के दुकानदार मोहम्मद खालिद भी पिछले साल के मुकाबले बाजार को मंदा बता रहे हैं। हालांकि, इन्हें उम्मीद है कि एक-दो दिन में बाजार में रौनक आएगी।
कैश क्राइसिस से उपजी परेशानियों के बीच मसीही समाज के कई लोग इस बार क्रिसमस ट्री सजाने के मूड में नहीं हैं। कुछ लोग रस्म अदायगी के लिए छोटा क्रिसमस ट्री सजाने के लिए बजट बना रहे हैं। आकाश दीप, अमित राबर्ट, अभिषेक सुमेरा और मौरिसन जोसफ ने बताया कि हर साल बड़े साइज का क्रिसमस ट्री घर पर सजाते थे, लेकिन इस बार नोटबंदी के चलते बजट नहीं बन पा रहा है। ऐसे में या तो छोटा क्रिसमस ट्री सजाएंगे या फिर इससे परहेज करेंगे।
एरोकेरिया का पौधा
बाजार में एरोकेरिया के छोटे पौधे दो कीमत में हैं। एक पौधा 160 तो दूसरा अच्छी क्वालिटी का 220 रुपये में उपलब्ध है। बड़े साइज का पौधा साढ़े तीन सौ रुपये तक में बिक रहा है।
कृत्रिम क्रिसमस ट्री
बाजार में 50 से लेकर 3000 तक के कृत्रिम क्रिसमस ट्री हैं। चाइना निर्मित क्रिसमस ट्री भी उपलब्ध हैं। इनकी कीमत थोड़ी कम है, लेकिन चमक फीकी है। एक फीट का क्रिसमस ट्री 50 रुपये, दो फीट का 120, तीन फीट का 160, चार फीट का 400, छह फीट का 900 और आठ फीट का क्रिसमस ट्री 3000 रुपये का है।
सजावट पर भी खर्च
क्रिसमस ट्री खरीदने के बाद इसे सजाने के लिए स्टार, झालर, घंटियां आदि सामान अलग से लेना होता है। बाजार में क्रिसमस ट्री को सजाने के लिए एक से बढ़कर एक सामान उपलब्ध हैं। क्वालिटी के हिसाब से इनकी कीमतें भी अलग-अलग हैं।