मेडिकल कॉलेज में इन दिनों दिमाग की जांच ठप है। इसकी वजह महीने भर से खराब पड़ी ईईजी (इलेक्ट्रो इन्सेफेलेमोग्रॉफी) मशीन है। इसके चलते हर दिन करीब एक दर्जन से अधिक मरीज ईईजी जांच के लिए बाहर भेजे जा रहे हैं। इस जांच के लिए मरीजों को तीन से चार गुनी रकम चुकानी पड़ रही है। उधर कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
कॉलेज की जांच यूनिट पर सिर्फ मशीन की दुरुस्तगी का संकट नहीं है बल्कि डॉक्टर और कर्मचारियों की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है। करीब तीन साल से न्यूरोलॉजी विभाग में कोई डॉक्टर नहीं है। तीन साल पहले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एके ठक्कर के राम मनोहर लोहिया अस्पताल चले जाने के बाद से इस विभाग की अनौपचारिक जिम्मेदारी मेडिसिन विभाग के डॉ. पवन सिंह को सौंपी गई। चूंकि उनका विभाग से सीधा रिश्ता नहीं है लिहाजा न्यूरोलॉजी विभाग पर इसका प्रभाव साफ देखा जा सकता है।
डॉक्टर न होने से ईईजी मशीन को चलाने की जिम्मेदारी कॉलेज की एक सिस्टर साइमन को दी गई। लेकिन जब वो छुट्टी पर रहती हैं तो यूनिट का ताला लगना तय होता है। लेकिन अब तो मशीन ही खराब है, ऐसे में यूनिट पूरी तौर पर ठप हो गई है। लिहाजा कॉलेज के मेडिसिन और न्यूरो सर्जरी विभाग से भेजे गए सभी मरीजों को प्राइवेट जांच सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें तीन गुनी रकम देनी पड़ रही है। कॉलेज में जहां इस जांच का यूजेज चार्ज 133 रुपये है, वहीं बाहर के जांच सेंटर इसके लिए तीन से चार सौ रुपये वसूलते हैं।
कॉलेज में ईईजी जांच नहीं हो रही है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यदि मशीन खराब हो गई है तो उसे जल्द से जल्द ठीक करा लिया जाएगा। शुक्रवार को संबंधित डॉक्टर और सिस्टर से जानकारी ली जाएगी और कोशिश होगी आगे भी जांच में किसी तरह की दिक्कत न आए।
- प्रो. राजीव कुमार मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज