ताल-पोखरे भूगर्भ जलस्तर को बेहतर बनाए रखने के लिए सबसे बेहतर स्रोत होते हैं, लेकिन गोरखपुर में स्थिति यह है कि वाटर रिचार्ज के इन अधिकांश स्रोतों पर अवैध कब्जा होने से कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। स्थिति यह है कि एक समय में शहर में जहां 200 से ज्यादा ताल, पोखरे थे, लेकिन अब इनकी संख्या 50 से भी कम रह गई है। वहीं आए दिन बचे इन तालाबों पर कहीं न कहीं कब्जा करने की शिकायत आती रहती है।
शासन की ओर से बहुत पहले ही नगर निगम को अपनी संपत्ति का ब्योरा तैयार करने और अवैध कब्जे हटाने को कहा जा चुका है। इसके बावजूद नगर निगम के पास अपनी संपत्तियों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है। क्योंकि आए दिन नगर निगम की संपत्तियों पर कब्जा होने की जानकारी आती रहती है। इनमें कई ताल पोखरे भी हैं। इन जल स्रोतों पर कब्जा होने से भूगर्भ जलस्तर लगातार घटता जा रहा है।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग के शोध छात्रों की रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर शहर में रामगढ़ ताल समेत कुल 202 तालाब हुआ करते थे। अब इनकी संख्या 50 ही रह गई है। इनमें पोखराभिंडा उर्फ करीमनगर में 4.42 एकड़ में तीन, जंगल नकहा नंबर एक में 13.09 एकड़ में चार, जंगल नकहा नंबर दो में 1.31 एकड़ में, सलेमपुर उर्फ मुगलपुर फत्तेपुर में 2.02 एकड़ में, फत्तेपुर में 2.26 एकड़ में, बशारतपुर में 5.83 एकड़ में, सलेमपुर उर्फ मुगलपुर में 1.17 एकड़ में, मानबेला में 4.03 एकड़ में, झुंगिया में 3.28 एकड़ में एक-एक तालाब है। इसके अलावा महुई सुघरपुर, महेबा आदि जगहों पर नगर निगम के तालाब हैं। हालांकि नगर निगम 100 से ज्यादा तालाब होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से 41 तालाब ही नजर आते हैं। नगर निगम के नायब तहसीलदार ने बताया कि नगर निगम 41 तालाबों का पट्टा करता है।
विश्व पृथ्वी दिवस पर नन्हों ने जीता दिल
विश्व पृथ्वी दिवस पर शनिवार को शहर के कई स्कूल, कॉलेजों में कार्यक्रम हुए, जिसमें विद्यार्थियों, वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रस्तुतियां दी। वायु सेना विद्यालय के नन्हें बच्चों ने फेस पेंटिंग, पोस्टर पेंटिंग और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके साथ ही पृथ्वी के रखरखाव और संरक्षण के विचार रखे। वायु सेना विद्यालय की 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने पृथ्वी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए। साथ ही प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनाने का संकल्प भी लिया। इस मौके पर बलराज कौर, प्रिंसिपल शाजिया खान आदि उपस्थित थे।
जेसीआई मिडटाउन ने विंध्यवासिनी पार्क में ‘परवरिश परिंदों के’ नाम से कार्यक्रम कराया गया। अध्यक्ष जेसी विवेक अग्रवाल ने बताया कि गौरैया जैसी आसानी से पाई जाने वाली पक्षी भी विलुप्त होने लगी है। इस मौके पर जेसी रेंट विंग की चेयरपर्सन श्वेता अग्रवाल ने अधिक से अधिक पौधे तथा वृक्ष लगाने को प्रेेरित किया। इस मौके पर पियूष जैन और अनिल जैन आदि मौजूद थे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री राकेश मौर्य ने बताया कि विद्यार्थी विकासार्थ के माध्यम से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक प्रतिबंध, वन्य जीवन संरक्षण, कृषि भूमि संरक्षण और वायु शुद्धीकरण आदि कार्य करते है। इस मौके पर दीपक कुमार, हिमांशु चंद कौशिक आदि उपस्थित थे। भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया के पदाधिकारी रूप कुमार बनर्जी की ओर से पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की गई। इस मौके पर दयाशंकर, रेल अधिकारी वीके सिंह आदि मौजूद थे।
‘घटते ताल-पोखरे चिंता का सबब’
विश्व पृथ्वी दिवस पर स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज में शनिवार को गोरखपुर एनवायरनमेंटल एक्शन ग्रुप, वन विभाग व महानगर पर्यावरण मंच ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। कहा गया कि रहन-सहन की आदतों को बदल कर हम पर्यावरण बचा सकते हैं क्योंकि गर्मी और ठंड से बचने के लिए किए गए आधुनिक उपायों ने ही इसे बिगाड़ दिया है। इस मौके पर पोस्टर प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें लगभग 400 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें पृथ्वी को बचाने एवं वृक्षों के कटान से हो रहे नुकसान को प्रमुखता से चित्रित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन विभाग के एसडीओ एमके शुक्ला ने कहा कि कई देशों ने जलवायु परिवर्तन के खतरों को ठीक से समझा है। वे पर्यावरण असंतुलन के हानियों से कम प्रभावित हैं। हमें भी अपनी युवा पीढ़ी को इस प्रकार तैयार करना होगा कि वे पर्यावरण को बचाने की पहल करें। महानगर पर्यावरण मंच के डॉ. एच. श्रीवास्तव ने कहा कि शहर में विभिन्न बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के दौरान जमीन के निचली सतह से बड़ी संख्या में पंप लगाकर बाहर भूगर्भ जल को बर्बाद किया जा रहा है। एक तो यह गैरकानूनी है, वहीं आने वाले समय में यह जल संकट पैदा कर देगा। उन्होंने शहर से ताल एवं पोखरों के सिकुड़ने और उनकी घटती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस दौरान कॉलेज की प्राचार्य स्नेहहिता चौहान, गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के समन्वयक जितेंद्र द्विवेदी, रेंजर अनिल कुमार के अलावा अन्य कई लोग मौजूद थे।