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दीमक चाट गई सैकड़ों एनएससी व केवीसी

Tue, 16 Feb 2016 02:01 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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ग्राहकों से जुड़े जरूरी दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर डाक विभाग कितना संजीदा है, इसकी बानगी सोमवार को लेबर कैंप डाकघर में देखने को मिली। दोपहर तक डाकखाने का ताला न खुलने पर  ग्राहकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान चर्चा फैली कि डाकघर के तमाम कीमती दस्तावेज दीमक चाट गई है, जिनमें ग्राहकों के छह सौ से अधिक किसान विकास पत्र (केवीसी) और राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) भी शामिल हैं। ग्राहकों का सामना करने से बचने के लिए स्टाफ डाकघर खोलने से बच रहा है।
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तय समय पर सुबह 10 बजे जब लेबर कैंप के डाकघर का ताला नहीं खुला तो जरूरी काम से आने वाले तमाम ग्राहक वापस लौट गए। दोपहर तक फिर आने वाले ग्राहकों को स्थिति में बदलाव नहीं मिला तो उनकी बेचैनी बढ़ी। तब तक चर्चा फैली कि तमाम ग्राहकों की बचत का प्रमाण दीमक की भेंट चढ़ जाने से कर्मचारी डाकघर खोलने से बच रहे हैं। इस चर्चा के साथ भीड़ बढ़ी और हंगामा तेज हो गया। इस जानकारी पर प्रधान डाकघर से जब लेबर कैंप डाकघर के प्रभारी रवींद्र सिंह से संपर्क साधा गया तो उन्होंने तबीयत खराब होने की जानकारी के साथ चाभी प्रवर अधीक्षक डाक के दफ्तर भिजवा दी। बताते हैं कि पोस्टमास्टर एसके पांडेय के छुट्टी पर जाने के बाद रवींद्र सिंह को 20 दिन पहले ही इस डाकघर का प्रभारी बनाकर भेजा गया था।

प्रवर अधीक्षक ने प्रधान डाकघर के कर्मचारी जयराम यादव को यह चार्ज सौंपना चाहा था लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। काफी कवायद के बाद दो बजे के बाद डीके प्रसाद को चाभी देकर भेजा गया और डाकघर खोलकर कामकाज शुरू किया गया। इस दौरान एनएससी और केवीसी के बाबत पूछने वाले ग्राहकों को संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
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कहा जा रहा है कि दीमक के कारण नष्ट हो चुके केवीसी और एनएससी में तमाम ऐसे हैं जिनकी अवधि पूरी हो गई है। ग्राहक भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं, जिससे बचने के लिए स्टाफ की छुट्टी और अस्थायी चार्ज जैसी तस्वीर सामने आ रही है।

कुछ दस्तावेजों को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है लेकिन इससे ग्राहकों पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। स्थायी स्टाफ आते ही समस्या समझकर हल निकाला जाएगा। डाकघर के देर तक न खुलने की बात गंभीर है। जानकारी मिलते ही वैकल्पिक स्टाफ से सेवा चालू करा दी गई थी।
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- देवव्रत तिवारी, प्रवर अधीक्षक (डाक)
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