कांग्रेस कार्यालय खाली होने के मामले को लेकर जिले में संगठन दो फाड़ हो गया है। एक खेमा मंगलवार को खुले तौर पर जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल को इसका दोषी मानते हुए इसकी शिकायत राहुल गांधी समेत पार्टी के बड़े नेताओं से कर चुका है।
पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक लालचंद निषाद की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में जिला महासचिव आलोक शुक्ल समेत पूर्व विधायक हरिद्वार पांडेय, दिनेश चंद्र श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष अरुण कुमार अग्रहरि आदि कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में इस मामले को लेकर जिलाध्यक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद राहुल गांधी समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं को प्रकरण की जानकारी भेजते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
इनका आरोप था कि जिलाध्यक्ष ने मुकदमे की पैरवी में लापरवाही बरती, जिससे पक्ष मजबूत होने के बाद भी फैसला पार्टी के खिलाफ गया। हालांकि बैठक में जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल मौजूद नहीं थे। इसे लेकर उन्होंने बताया कि पहले उन्हें 12 को बैठक होने की सूचना थी, पर अचानक इसे 11 अप्रैल को ही बुला लिया गया।
पद का नहीं है मोह, पर आरोप गलत
जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल ने कहा कि कुछ लोगों ने आरोप लगाए हैं, मगर ऐसा नहीं है कि इसे लेकर संगठन दो धड़े में बंट गया हो। कुछ साथियों को गलतफहमी हुई कि पार्टी कार्यालय खाली होने को लेकर उन्हें जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद तमाम साथियों को व्हाट्सएप एवं अन्य माध्यमों से सूचित किया गया। खुद कचहरी में इसे रोकने के लिए कोशिश में जुटा था। मंगलवार की बैठक में होता तो साथियों की गलतफहमी दूर हो जाती। पद का कोई मोह नहीं है, कुछ महीने पहले ही हाईकमान को लिखकर दे चुका हूं कि मुझे पद से हटा दिया जाए। कुछ लोगों ने निंदा प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन इस पर बैठक में आए सभी लोगों के हस्ताक्षर नहीं हैं। आजीवन पार्टी से निकालने की मांग बचकानी है। कांग्रेस से ही सियासत शुरू की और मरते दम तक साथ रहूंगा। नए कार्यालय की तलाश तेजी से जारी है।
16 को जिलाध्यक्षों की बैठक पर निगाहें
पार्टी कार्यालय खाली होने को लेकर ये खेमा अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। माना जा रहा है कि 16 अप्रैल को लखनऊ में जिलाध्यक्षों की बैठक में यह मामला और भी गरमाएगा। इसे लेकर कुछ कार्यकर्ता जिलाध्यक्षों की बैठक में पहुंचने की तैयारी में हैं। इस बैठक में गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर शिरकत कर सकते हैं। सूत्रों की माने तो गोरखपुर में पार्टी कार्यालय खाली कराने को लेकर इस बैठक के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं।