विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अादित्यनाथ।
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सीएम समेत तमाम वीआईपी के प्रोटोकाल और लॉ एंड आर्डर को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। महंत आदित्यनाथ के सीएम बनने की घोषणा के साथ ही प्रशासन और पुलिस समेत सभी सरकारी महकमों के अफसरों के चेहरे पर यह दबाव साफ महसूस भी किया जाने लगा है। शनिवार की शाम से ही अफसर, महंत की कार्यप्रणाली में अचानक रुचि लेने लगे। उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं, शहर में किन समस्याओं को लेकर वे ज्यादा संजीदा रहते आए हैं, आदि तमाम बिंदुओं पर अफसरों में चर्चा तेज हो गई हैं। अमूमन सुस्त रहने वाले अफसरों को भी अब इस बात का एहसास हो गया है कि उन्हें हर छोटी बड़ी घटना पर चौकस रहना पड़ेगा।
गोरक्षपीठ के प्रति महंत की आस्था की वजह से माना जा रहा है कि तमाम व्यस्तताओं के बीच भी उनका प्राय: गोरखपुर आना-जाना लगा रहेगा। ऐसे में प्रशासन और पुलिस की चुनौती और बढ़ जाती है। पांच बार से सांसद रहते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था, बिजली, बाढ़ और शहर में जलजमाव आदि समस्याओं को लेकर हमेशा विपक्ष की सरकार को घेरा है। ऐसे में इन सभी समस्याओं के निस्तारण का उन पर दबाव होगा। साथ ही संबंधित महकमों पर भी। प्रोटोकाल को लेकर प्रशासन को हमेशा चौकन्ना रहना पड़ेगा तो कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस को। इसके अलावा जन सरोकार से जुड़े विभागों की भी जिम्मेदारी अब बढ़ जाएगी। शहर में गंदगी, जलभराव और बिजली कटौती, बड़ी समस्या होने की वजह से नगर निगम, जीडीए और बिजली महकमों के अफसरों के लिए चुनौती बढ़ जाएगी।