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‘एंबुलेंस’ बनी डायल 100 तो बची युवक की जान

Sun, 04 Dec 2016 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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यूपी-100 - फोटो :
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यूं तो पुलिस को लोग मारपीट या विवाद होने पर ही बुलाते हैं, मगर एक परिवार ने शनिवार को बेटे के कीटनाशक पीने पर मदद मांग ली। पुलिस भी मददगार बनी तो युवक की जान बच गई। प्राइवेट अस्पताल में युवक को भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर ने भी कहा कि थोड़ी सी देरी जीवन पर भारी पड़ सकती थी। युवक अब खतरे से बाहर है।
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गोरखनाथ इलाके के सुभाषनगर निवासी प्रदीप कन्नौजिया ने घरवालों से नाराज होकर शनिवार को कीटनाशक पी ली। घरवालों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, तुरंत ही डायल 100 पर इसकी सूचना दे दी। सूचना पाकर डायल 100 के 216 नंबर वाहन के प्रशांत और मनोज वहां पहुंच गए। दोनों ने प्रदीप को पास के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया। सही वक्त पर मिले इलाज से प्रदीप की जान बच गई।

पुलिस के इस सराहनीय काम की घरवाले भी प्रशंसा कर रहे हैं तो आसपास के लोग भी इस बात से खुश हैं कि अक्सर पुलिस ऐसे मामलों में एंबुलेंस आदि बुलाने की सलाह देकर लौट जाती है, मगर इस बार पुलिस ने खुद की गाड़ी को ही एंबुलेंस बनाकर युवक की जान बचा ली।  ईमानदारी दिखाने वाले सिपाही पुरस्कृत ईमानदारी दिखाने वाले दो सिपाही पुनीत सिंह और अतुल कुमार सिंह को एसएसपी रामलाल वर्मा ने पुरस्कृत किया। रुस्तमपुर के श्रवण दुबे शुक्रवार को बैंक रोड स्थित एक मॉल में दोस्तों के साथ खरीदारी करने गए थे। इस दौरान इनका पर्स गिर गया, जिसमें छह हजार रुपये और कई जरूरी कागजात थे। दोनों सिपाही विजय चौक स्थित एक होटल में खाना खाने आए थे। यहां से गुजरते वक्त रास्ते में उन्हें वह पर्स मिल गया। उसमें रखे बैंक की रसीद पर लिखे नंबर पर फोन कर दोनों ने पर्स श्रवण तक पहुंचाया। इसके लिए एसएसपी ने शनिवार को पुनीत और अतुल को पुरस्कृत किया। वहीं तिवारीपुर में गांजा पकड़ने वाले सिपाहियों एनुल हक अंसारी, रूदेश नंदन पांडेय, अरुण यादव और कुलेेंद्र राय को भी पुरस्कृत किया गया। 
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