दुर्गा प्रतिमा की आरती उतारते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी तिथि के प्रस्थान व महानवमी तिथि के आगमन पर शहर के कई पूजा पंडालों में इतवार को संधि पूजा का आयोजन किया गया। तय समय पर पूजा पंडालों में वेदमंत्र गूंजें। ढोल-नगाड़ों की धुन पर पूजा के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। खासकर दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी, घोष कंपनी और दीवान बाजार में।
शनिवार की सुबह मां भगवती के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए शहर के सभी देवी मंदिरों, शक्तिपीठों और पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नारियल और चुनरी के साथ फूल चढ़ाकर मां महागौरी का आह्वान किया और मनोकामना पूर्ण करने का वरदान मांगा। नवरात्र की चढ़ती-उतरती उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने अष्टमी के दिन उपवास कर पूजा पूर्णाहुति की। नगर के बेतियाहाता व गोलघर स्थित काली मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही मां के दर्शन के लिए श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी, स्टेशन रोड, घोष कंपनी, दीवान बाजार, गोलघर, असुरन चौक, बसंतपुर, आजाद नगर, रुस्तमपुर, कूड़ा घाट आदि मोहल्लों के पंडालों में मेले जैसा माहौल रहा। सुबह से ही कतारबद्ध होेकर श्रद्धालुओं का पंडालों में पहुंचने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह देर रात तक जारी रहा।
भा गई सुर और नृत्य की जुगलबंदी
अष्टमी और नवमी की संधि के अवसर पर इतवार को कई पूजा पंडालों में सांस्कृतिक आयोजन किए गए। दुर्गाबाड़ी में शाम पांच बजे संधि पूजा के पहले से ही यह सिलसिला शुरू हो गया। ‘मेरी आवाज सुनो’ प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने अपना सुर छेड़ा, जिसका मेले के दौरान पहुंचे लोगोें ने जमकर लुत्फ उठाया। रात नौ बजे नृत्य नाटिका ‘मेरे तो गिरधर गोपाल’ का प्रदर्शन हुआ, जिसमें सुर और नृत्य की जुगलबंदी देख लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की। एनई रेलवे दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से रेलवे बालक इंटर कॉलेज में स्थापित प्रतिमा स्थल पर क्विज और शंख प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसे लेकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। रात आठ बजे आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
यहां तो केवल ‘मां’ का आह्वान
शहर के कई प्रतिमा स्थल पर पूजा के साथ-साथ तमाम सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी भी दुर्गा पूजा समितियां हैं, जिन्होंने परंपराओं को इतना महत्व दिया है कि वे आयोजन में किसी तरह के बदलाव को स्वीकार करने को तैयार नहीं। इनमें पिछले चार-पांच दशक से स्थापित हो रही कालीबाड़ी, दीवान बाजार व घोष कंपनी का नाम प्रमुख है। कालीबाड़ी के आयोजक मनोज जसरापुरिया ने बताया कि लोगों ने तमाम तरह के बदलाव की बात कही, लेकिन हमने इसे स्वीकार नहीं किया। यहां केवल मां का आह्वान होता है। घोष कंपनी के आयोजक विश्वास ने बताया कि प्रतिमा स्थल पर किसी तरह के आयोजन से पूजा में विघभन पड़ता है। दीवान बाजार के आयोजक मंडल के लोग कहते हैं कि उनका ध्यान सिर्फ इस पर रहता है कि पूजा में किसी तरह की कोई कमी न रह जाए।