जमीन की कमी से जूझ रहे जीडीए को मानबेला के रूप में संजीवनी मिल गई है। जीडीए और किसानों के बीच सहमति बनने से 225 एकड़ जमीन अब जीडीए को मिल जाएगी। जीडीए आने वाले दस सालों में इसे विकसित कर इसे नया रूप देगा। राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के अलावा यहां स्टेडियम, शॉपिंग कांप्लेक्स, बहुमंजिली आवासीय योजनाओं के जरिए इस क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। यह सारी योजनाएं नो प्रॉफिट नो लॉस पर संचालित होंगी।
2003 में मानबेला की 225 एकड़ भूमि का अधिग्रहण जीडीए ने किया। 2005 में जब उसने इस पर कब्जा पाने की कोशिश शुरू की तब किसान लामबंद हो गए। 2008 में कब्जे को लेकर किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तो योगी आदित्यनाथ किसानों के पक्ष में खड़े हो गए। योगी के सीएम बनने के बाद से ही मामले में किसानों के पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद थी। पिछले दिनों मानबेला के किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला तो उन्होंने प्रति हेक्टेयर दिया जाने वाला 28 लाख का मुआवजा प्रति एकड़ कर दिया। सीएम के हस्तक्षेप के चलते जीडीए प्रशासन सोमवार को किसानों के साथ हुई बैठक में प्रति हेक्टेयर 70 लाख रुपये का मुआवजा देने को राजी हो गया। इससे मानबेला में प्रस्तावित राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के 963 आवंटियों के साथ ही 1200 किसानों को बड़ी राहत मिली है।
जीडीए वीसी ओएन सिंह ने बताया कि जीडीए मानबेला का विकास नो प्रॉफिट नो लॉस पर कराएगा। 25 एकड़ में स्टेडियम और 5 एकड़ में स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाया जाएगा। स्किल डेवलपमेंट सेंटर के जरिए किसानों के बच्चे रोजगार परक शिक्षा पा सकेंगे।
राप्तीनगर विस्तार तो मानबेला का एक हिस्सा
मानबेला की जमीन के एक हिस्से पर ही राप्तीनगर विस्तार योजना तैयार होगी। 963 आवंटियों के लिए 57.57 एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी। शेष रकबे पर जीडीए अन्य योजनाएं संचालित करेगा। जीडीए कुछ आवासीय परियोजनाएं शुरू कर यहां से धन भी जुटा सकेगा और इस आय को क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी कामों पर खर्च करेगा।
अभी कमिश्नर का अप्रूवल बाकी
जीडीए प्रशासन और किसानों के बीच भूमि अधिग्रहण को लेकर सहमति भले ही बन गई है, पर इसे अभी कमिश्नर से अनुमति मिलनी बाकी है, जिसे हासिल कर जीडीए जल्द ही किसानों को मुआवजा बांटना शुरू कर देगा। वीसी ओएन सिंह ने बताया कि एक से डेढ़ हफ्ते में प्रक्रिया पूरी कर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।