अवैध खनन को लेकर बढ़ रही शिकायतों पर डीएम ने जब बैठक के दौरान खनन इंस्पेक्टर को पूछा तो बताया गया कि वे उपस्थित नहीं है। इसपर वह बिफर पड़े और उनका वेतन रोकने के साथ ही अगली किसी भी बैठक में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी। इसी तरह बिना किसी सूचना के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के भी लखनऊ में होने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनसे जवाब तलब किया जाए कि बिना उन्हें सूचित किए वे मुख्यालय से कैसे बाहर चले गए। उन्होंने उनका भी वेतन रोकने का निर्देश दिया।
इसी तरह तहसीलों में रात्रि विश्राम नहीं करने पर उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार से कहा कि उनमें से ज्यादातर लोग शाम होते ही तहसील छोड़ दे रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन्हें शहर में आवास आवंटित हैं, वे बेशक रात यहीं पर गुजारे मगर नौ बजे के पहले तहसील न छोड़ें। उन्होंने कहा कि अफसर शाम पांच बजे ही शहर आ जा रहे हैं। वहां बिजली कब आ रही है, कब जा रही है, किसी को कोई फिक्र नहीं। अगर ये अफसर रात को वहां वक्त बिताते तो मातहत तहसील से जुड़ी समस्याओं को न केवल उनसे साझा करते बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी कुछ कारगर प्रयास हो पाते।