जल जमाव की वजह से यदि बीमारी फैली तो नगर निगम के साथ ही मकान व दुकान मालिक की भी जवाबदेही होगी। शासन ने मच्छर, मक्खी, कीटों के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारियों को रोकने के लिए मिनी कोर्ट बनाने का फैसला किया है। सीएमओ दफ्तर में यह कोर्ट बनेगा और यहां पर एक अफसर को मजिस्ट्रीयल पॉवर दिया जाएगा, जो ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे। मिनी कोर्ट को आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की शक्तियां प्रदान की जाएंगी, जिसके तहत कोर्ट जेल या जुर्माना या दोनों का दंड दे सकते हैं।
शहर में जल जमाव की वजह से डेंगू, मलेरिया, इंसेफेलाइटिस जैसी तमाम जानलेवा बीमारियां फैलती हैं। इसे लेकर कई बार शहरी क्षेत्र में सफाई के लिए भी स्वास्थ्य महकमे की ओर से पत्राचार होता है मगर कार्रवाई नहीं हो पाती है। अब स्वास्थ्य महकमे को ही शक्तिशाली बनाने की सरकार ने पहल कर दी है। मिनी कोर्ट बनाकर वहां पर सुनवाई की जाएगी। इसमें आम जन भी पहल कर सकते हैं या कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। कोर्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जल्द ही यह क्रियाशील हो जाएगा।
आईपीसी की धारा 188 में है प्रावधान
भारतीय दंड संहिता धारा 188 के अंतर्गत कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। सजा एक महीने की हो सकती है। वही जुर्माना दो सौ रुपये तक लगाया जा सका है। दोनों से भी दंडित करने का अधिकार इस धारा में है। यदि भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को नुकसान हो या नुकसान पहुंचाने की नीयत हो तो कारावास छह महीने का भी हो सकता है। ऐसी दशा में जुर्माने की रकम भी एक हजार देना होगा।
मिनी कोर्ट द्वारा नोटिस जारी कर सुनवाई की जाएगी। यदि कहीं भी गंदगी रहती है या जलजमाव बना रहता है और उससे वेक्टर बार्न बीमारियों के पनपने का खतरा होता है तो नगर निगम संबंधित मकान या दुकान मालिक को नोटिस भेजेगा।
- डॉ. एके पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी