गोरखपुर। ट्रेंड डॉक्टर के रिटायर होने के चलते जिला अस्पताल में सीटी स्कैन को आने वाले मरीजों को पिछले कई दिनों से मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। यहां भी सीटी स्कैन के लिए संबद्ध डायग्नोसिस्ट सेंटर का सहारा है। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए अतिरिक्त शुल्क तो भरना ही पड़ रहा है साथ ही तमाम दिक्कतें और भी झेलनी पड़ रही हैं। ट्रेंड डॉक्टर के बिना मरीज परेशान हैं तो मरीजों का दर्द कम करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर इस मुद्दे पर पत्राचार करके आपसी खुनन्नस साधने में जुटे हैं।
बीतें दिनों एसआईसी की कुर्सी को लेकर एडी हेल्थ और वर्तमान एसआईसी में रार हो गई थी। तब से पत्रों के माध्यम से दोनों ही अफसर बातें किया करते हैं। इसी बीच 31 जनवरी को सीटी स्कैन करने वाले ट्रेंड डॉक्टर रिटायर हो गए और सीटी स्कैन जांच ठप हो गई। जबकि एक डॉक्टर को अटैच करने के लिए एसआईसी ने पहले ही पत्र लिखा था और कई बार रिमाइंडर भी किया मगर इस पर एडी हेल्थ ने न तो डॉक्टर दिया और न ही कोई जवाब।
जिला अस्पताल में 500 रुपये में होनी वाली जांच मेडिकल कॉलेज से संबद्ध प्राइवेट डायग्नोसिस्ट सेंटर में 820 रुपये में करानी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी मेडिकोलीगल कराने वालों की है। चूंकि मेडिकल कॉलेज में अन्य मरीजों का तो सीटी स्कैन जैसे तैसे हो जा रहा है मगर मेडिकल केस होने की वजह से वह जांच नहीं कर रहे हैं और मेडिकल कॉलेज के पास सीटी स्कैन मशीन ही नहीं है। वह भी प्राइवेट डायग्नोसिस्ट सेंटर से रियायती दर पर सेवा लेता है। ऐसे में जिला अस्पताल से जाने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। पूरे मंडल में सिर्फ गोरखपुर जिला अस्पताल में ही यह सुविधा है।
एसआईसी से ही पूछे डॉक्टर के नाम
गोरखपुर मंडल का प्रभार देखने वाले अपर निदेशक स्वास्थ्य ने एसआईसी को जो पत्र लिखा है वह चर्चा में है। एडी हेल्थ ने एसआईसी से ही पूछ लिया है कि वह बताए कि मंडल में किस जिले में सीटी स्कैन को चलाने के लिए ट्रेंड डॉक्टर हैं। अब एसआईसी को भी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वह इसका क्या जवाब दे? चूंकि पूरे मंडल का प्रभार और लेखाजोखा तो एडी के पास ही होता है।
मंडल में हैं दो ट्रेंड डॉक्टर
देवरिया और महराजगंज में डॉक्टर तैनात हैं जो सीटी स्कैन को चलाने की ट्रेनिंग ले चुके हैं। देवरिया जिला अस्पताल में डॉ. टीएन झा और महराजगंज में डॉ. सुनील कुमार। यह दोनों ही रेडियोलॉजिस्ट हैं और एडी आसानी से अटैच कर सकते हैं।
‘मरीज हित को देखते हुए मैंने पहले ही एडी हेल्थ को पत्र भेज दिया था कि जब तक शासन से ट्रेंड डॉक्टर नहीं मिल जाते तब तक दूसरे जिले से डॉक्टर दे दें ताकि मरीजों का सीटी स्कैन हो सके। अब वह पत्र भेजकर मुझसे ही पूछ रहे हैं।’
डॉ. एचआर यादव, एसआईसी