गोरखपुर। पहले से ही दवाओं के संकट से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज की दिक्कतें बढ़ गई हैं। बकाया ज्यादा होने की वजह से दुकानदार ने उधारी की दवा देने से इंकार कर दिया था। अब अनुबंध खत्म होने पर गार्जियन दवा केंद्र पर ताला लग गया है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले गरीब मरीजों की परेशानी दवा को लेकर और बढ़ गई है।
गार्जियन से बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त में दवाएं और अन्य मरीजों को रियायती दर पर दवाएं मिलती थीं। इस वजह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी अनुबंध खत्म होने के बावजूद बंद करने पर जोर नहीं दिया। मगर जब उधारी बढ़ने पर गार्जियन ने दवाएं देने से ही इन्कार कर दिया तो अस्पताल प्रशासन ने भी सख्ती से बंदी का पालन करा दिया। अब दुकान बंद होने का बोर्ड टंग गया है।
बता दें कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की निर्देश पर 2008 में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों समेत कई चिकित्सा संस्थानों में ‘गार्जियन’ की श्रृंखला खोली गई थी। इसके तहत गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भी एक इनडोर व एक आउटडोर मेडिकल स्टोर का अनुबंध हुआ था। तीन वर्ष के इस अनुबंध के तहत वार्ड नंबर दो के पास व अस्पताल के मुख्य द्वार पर ‘गार्जियन’ की शाखा खोली गई।
साल जाते-जाते इनडोर की शाखा तो बंद हो गई लेकिन आउटडोर की चलती रही। जब 2011 में अनुबंध समाप्त हुआ तो कॉलेज प्रशासन ने इसे बंद करने की नोटिस दे दी। कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए ‘गार्जियन’ प्रबंधन ने बंद करने से इन्कार कर दिया था।
अनुबंध खत्म हो होने की वजह से दुकान बंद हुई है। वार्ता कर प्रयास किया जा रहा है कि शीघ्र इसे शुरू कराया जाए। ताकि मरीजों को दिक्कत न हो।
डॉ. एमक्यू वेग, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज