पुलिस लाइंस में आईजी जोन ने शुक्रवार को साइबर क्राइम पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने ट्रेनिंग में आए जोन के 25 पुलिसकर्मियों से ध्यान लगाकर कार्यशाला में बताए गुर सीखने को कहा। पहले दिन फेसबुक, ई-मेल से धमकी देने, ब्लैकमेल करने वाले लोगों का पता लगाने का तरीका समझाया गया। कार्यशाला रविवार तक चलेगी।
गोरखपुर, बस्ती, देवीपाटन रेंज के 11 जिलों से आए 25 पुलिसकर्मी शुक्रवार की सुबह दस बजे पुलिस लाइंस पहुंचे। सुबह 11:30 बजे आईजी मोहित अग्रवाल, डीआईजी शिवसागर सिंह, एसपी क्राइम ओपी के साथ पहुंचे। प्रशिक्षण देने एक्सपर्ट सचिन गुप्ता और उनके साथियों से पुलिसकर्मियों का परिचय कराया। आईजी ने कहा कि आज के समय में अपराध का तरीका बदल गया है। आनलाइन जालसाजी, इंटरनेट से धमकी के साथ ही सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। बदमाशों को पकड़ने की खातिर पुलिस के लिए इनकी जानकारी लेना बहुत जरूरी है। एक्सपर्ट ने दरोगा को ई-मेल से मिलने वाली धमकी, फेसबुक, व्हाट्स एप पर होने वाले दुष्प्रचार को रोकने और इसमें शामिल लोगों तक पहुंचने का तरीका पुलिसकर्मियों को बताया।
इंटरपोल की मदद से पता लगाएं यूजर आईडी का
विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी का पता लगाने को यूजर आईडी का पता लगाना बेहद जरूरी होता है। इसकी प्रक्रिया का पालन करेंगे तो इंटरपोल यूजर आईडी का पता लगाकर बता देगा। गूगल, फेसबुक आदि के मुख्यालय विदेशों में है, इसलिए इंटरपोल से इसके लिए मदद मांगनी होती है।
साइबर अपराधियों एसएमसीआरसी रख रही नजर
विशेषज्ञों ने बताया कि यूपी पुलिस की एसएमसीआरसी (सोशल मीडिया कंट्रोल एंड रिसर्च सेंटर) साइबर अपराधियों पर नजर रख रही है। आए दिन सामने आ रहे नए तरीके के साइबर अपराध व अपराधियों पर एसटीएफ लखनऊ और डीआईजी मेरठ कार्यालय में रिसर्च चल रहा है। एसमसीआरसी से प्रदेश के 18 रेंज जुड़ गए हैं। सभी रेंज के अपने यूजर आईडी और पासवर्ड हैं।
इन मामलों की दी गई जानकारी
पुलिस या स्वयं के डाटा सुरक्षित रखने की जानकारी
बैंक फ्रॉड रोकने के उपाय
ईमेल भेजने वाले का पता लगाना
फर्जी फेसबुक आईडी बनाने वाले को ट्रेस करना
असली-नकली वेबसाइट में फर्क
ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग एवं ई-मेल कम्युनिकेशन के खतरे व सावधानियां
मोबाइल यूजर्स के खतरे और सावधानियां
वाईफाई प्रयोग के दौरान डाटा हैक होने के खतरे