वाराणसी के राजघाट पुल पर हुए हादसे में कईयों की मौत हुई थी।
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वाराणसी में जय गुरुदेव के सत्संग के दौरान हुए हादसे में जान गंवाने वाले दशरथ (70) का शव गोला स्थित उनके गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। अभी एक साल भी नहीं बीता था जब उनके जवान पुत्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। साल भीतर दो-दो मौतों से परिवार ही नहीं गांव के लोग भी दुखी नजर आए। इस हादसे में जान गंवाने वाली गोरखपुर के खजनी की इमरती देवी (62) का उनके पति राजेंद्र ने वाराणसी में ही दाह संस्कार कर दिया।
जय गुरुदेव के दो दिवसीय सत्संग में शामिल होने के लिए गोरखपुर से भी बड़ी संख्या में लोग वाराणसी गए थे। गोला प्रतिनिधि के अनुसार गोला के बरहजे गांव के दशरथ सिंह अपने क्षेत्र के कई लोगों के साथ वाराणसी गए थे, जबकि खजनी प्रतिनिधि के मुताबिक मऊ धरमंगल गांव के राजेंद्र पत्नी इमरती देवी समेत चार सौ अनुयायियों के साथ बस से गए थे। इसी दौरान राजघाट पुल पर हुए हादसे में जिन 25 लोगों की मौत हुई उनमें गोरखपुर के भी दो अनुयायी शामिल थे।
पुल हिलने की अफवाह से मची थी भगदड़
पत्नी इमरती देवी की मौत से दुखी राजेंद्र ने हादसे की वजह उस अफवाह को बताया जो किसी ने यह कहकर फैला दी कि राजघाट का पुल हिल रहा है। बकौल राजेंद्र, उनकी पत्नी इमरती देवी उनसे कुछ ही दूरी पर थीं। तभी कुछ लड़कों ने अफवाह फैला दी। इसके बाद सभी लोग पुल पर भागने लगे। मैंने पत्नी को पकड़ लिया था मगर लोगों के धक्के में हाथ छूट गया और वह नीचे गिर र्गइं। भगदड़ में कुचलकर उनकी मौत हो गई और मैं कुछ नहीं कर सका। मैंने खुद की जान बड़ी मुश्किल से ही बचाई। जहां तक दशरथ (70) की बात है तो करीब 30 साल के वह जय गुरुदेव के शिष्य थे। देश में जहां भी जय गुरुदेव का सत्संग होता है, वह हर जगह पहुंचते थे।