चौरीचौरा इलाके के डुमरीखास गांव में चुनावी रंजिश में जलाए गए दूसरे युवक नर्वदा की भी मौत हो गई। लखनऊ के एक अस्पताल में नर्वदा का 12 अक्टूबर से ही इलाज चल रहा था, जहां बुधवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया। उधर घटना के एक हफ्ते बाद भी पुलिस आरोपी बनाए गए किसी भी युवक की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है।
मालूम हो कि पूर्व प्रधान राजदेव पासवान की सीमेंट पाइप बनाने की फैक्ट्री के बरामदे में सो रहे बांसगांव, भैंसहीं बुजुर्ग निवासी उनका मौसेरा भाई संतोष (32) और गांव के रामसिंहासन उर्फ नर्वदा (33) पर 11 अक्टूबर की रात कुछ लोगों ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी। दोनों चिल्लाते हुए मदद के लिए गांव की ओर भागे। गांव वालों ने किसी तरह से आग पर काबू पाया और दोनों को लखनऊ के एक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था, जहां अगले ही दिन संतोष की मौत हो गई थी, जबकि नर्वदा वहां जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। बुधवार को उसकी भी मौत हो गई।
इस वारदात के बाद से गांव के लोगों में काफी नाराजगी है। घटना के पीछे चुनावी रंजिश की बात सामने आई थी। उधर, पुलिस ने घटना के बाद राजदेव के पट्टीदार कमलदेव पासवान की तहरीर पर प्रधान राधेश्याम मौर्य के बेटे ओम मौर्य, अजीत यादव समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि इस मामले में अभी पुलिस कुछ खास कार्रवाई नहीं कर सकी है।