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व्यापारी हत्याकांड के खुलासे में पुलिस फेल

Mon, 15 May 2017 07:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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क्राइम
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अल्टीमेटम के बाद भी गोरखपुर पुलिस व्यापारी चंद्र प्रकाश टिबड़ेवाल की हत्या और लूटकांड का पर्दाफाश नहीं कर सकी। शक के आधार पर एक संदिग्ध को हिरासत में जरूर लिया गया लेकिन मामले की गुत्थी सुलझाने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा सकी। अब भी अंधेरे में हांथ-पांव मारे जा रहे हैं। लग रहा है कि पुलिस का पूरा तंत्र बेकार हो गया। पुलिस की छानबीन पर अपराधियों की चालाकी भारी पड़ रही है।  
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शनिवार (13 मई) को गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृत व्यापारी की पत्नी सुनीता, बेटी आस्था और बेटे स्वयं से सर्किट हाउस में मुलाकात की थी। वहीं मुख्यमंत्री ने डीएम राजीव रौतेला और एसएसपी आरपी पांडेय को हत्या और लूटकांड का पर्दाफाश करने का आदेश दिया था। इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित की लेकिन पुलिसिया तंत्र इस पर खरा नहीं उतर सका। व्यापारी के हत्यारे अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इससे व्यापारियों में नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि पुलिस जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही है। घटना के खुलासे में देरी से व्यापारी डरे हैं। इस सिलसिले में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ जाएगा। मुख्यमंत्री को बताया जाएगा चंद्रप्रकाश की हत्या और लूट के खुलासे में जुटी पुलिस हवा में तीर चला रही है। सीसीटीवी कैमरे की धुंधली फुटेज और तस्वीर के आधार पर कुछ संदिग्धों को तलाशा जा रहा है। हत्यारों तक पहुंचने के लिए गंभीर कोशिश नहीं की जा रही है।  
  पुलिसिया तंत्र फेल होने की बड़ी वजह 
1- मुखबिर तंत्र फेल
पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है। घटनाओं के बाद भी पुलिस सिर्फ सर्विलांस और आसपास के कैमरे की फुटेज को आधार बनाकर काम करती है। स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र के न होने से पुलिस की नाकामी बढ़ी है। 
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2- कैमरे की खराब क्वालिटी बनी मुसीबत
 पुलिस ने व्यापारियों और संभ्रात लोगों के साथ बैठकें कर प्रमुख चौराहों, बाजारों, गलियों में कैमरे लगाने की पहल की थी। इसका असर भी हुआ था लेेकिन कैमरे की क्वालिटी ठीक न होना मुसीबत है। व्यापारी हत्याकांड में कैमरे सही होते तो तस्वीर साफ होती।

3- आपसी तालमेल नहीं
पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ में तालमेल नहीं है। घटना के खुलासे के लिए अलग-अलग टीमें जरूर लगाई गई हैं लेकिन सभी अपनी वाहवाही के चक्कर में लगे हैं। इस कारण एक-दूसरे से सूचनाएं नहीं शेयर कर रहे हैं। सब चाह रहे हैं कि घटना का खुलासा कर सीएम से वाहवाही ली जाए। 

4- पुलिस पर ज्यादा दबाव होना
बड़ी घटनाओं के बाद पुलिस को एक समय सीमा में बांध देना भी घटनाओं के पर्दाफाश में आड़े आता है। पुलिस पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। इससे पुलिस मामले का गलत पर्दाफाश करती है या फिर सही दिशा में काम ही नहीं कर पाती।

5- अपराधियों के गतिविधि की जानकारी नहीं
थाना पुलिस अपराधियों के गतिविधि की ताजा जानकारी नहीं रख पाती है। इसकी एक वजह पुराने सिपाही, दरोगा का न होना भी है। जल्दी-जल्दी स्थानांतरण की वजह से नए पुलिस वाले आते हैं और वह रिकॉर्ड पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते।
  हत्या की तरफ मुड़ी क्राइम ब्रांच की जांच व्यापारी की हत्या और लूट में अक एब नया मोड़ आ गया है। पुलिस जहां मामले को लूट मानकर पर्दाफाश करने की कोशिश में लगी है, वहीं क्राइम ब्रांच की जांच हत्या की तरफ मुड़ गई है। क्राइम ब्रांच ने चंद्रप्रकाश टिबड़ेवाल और उनके विवाद से संबंधित दो मामले तलाशे हैं। अब इन मामलों की तह में जाकर छानबीन की जा रही है। अफसरों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज से साफ हो गया कि असलहा दिखाते ही व्यापारी ने रुपयों से भरा बैग अपराधियों को थमा दिया था, फिर गोली मारने का औचित्य समझ से बाहर है। गोलू वर्मा को जिंदा छोड़ने के पीछे भी क्राइम ब्रांच कुछ तलाश रही है। फिलहाल, जमीन को लेकर भी चंद्रप्रकाश का विवाद चल रहा था। रुपयों के लेनदेन को लेकर भी विवाद था। अब पठानी सूट पहने एक व्यक्ति की तलाश सीसीटीवी फुटेज में चेहरा साफ न होने के बाद अब पुलिस पठानी सूट पहने एक व्यक्ति की तलाश में जुट गई है। इस व्यक्ति का बड़ा आपराधिक इतिहास है। पुलिस का नाम भी पता है लेकिन गिरफ्तारी में सफलता नहीं मिल सकी। पुलिस सूत्रों की माने तो जिले में एक शातिर अपराधी है, जो कि पठानी सूट पहनकर घूमता है। इस अपराधी पर गोरखपुर के अलावा बहराइच, सीतापुर, मऊ समेत कई जिलों में लूट के मुकदमे दर्ज हैं। उसने जितने भी अपराध किए हैं, उसमें पहनावा पठानी सूट का ही है। कद काठी भी लंबी-चौड़ी है। 
  बड़बोलेपन में फंस गए कप्तान  एसएसपी आरपी पांडेय ने हत्याकांड के खुलासे के लिए टीमें लगा दीं लेकिन मुख्यमंत्री के सामने बड़बोलेपन के कारण फंस गए। हत्याकांड का खुलासा 48 घंटे में नहीं कर सके। हालांकि एक संदिग्ध को उठाने का दावा किया गया है। पुलिस की तरफ से कहा गया कि मृत व्यापारी के कर्मचारी ने उसे पहचान भी लिया है। पुलिस के दावों पर यकीन करें तो घटना का पर्दाफाश हो जाता लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लोकेशन खंगाल रही पुलिस पुराने अपराधियों की लोकेशन अब मोबाइल नंबर के सहारे लेने की कोशिश है। इसके लिए एक्सपर्ट लगाए गए हैं। अलग-अलग मोबाइल कंपनियों से संपर्क साधकर दीवान बाजार सहित कई इलाकों के मोबाइल टॉवर से अपराधियों की लोकेशन निकालने की कार्रवाई भी चल रही है।
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