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जेल भेजे गये सजायाफ्ता गोपाल यादव

Sun, 06 Dec 2015 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे सजायाफ्ता कैदियों को डिस्चार्ज किये जाने का सप्ताह भर पहले शुरू हुआ सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा।
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रामवृक्ष यादव से शुरू हुए इस क्रम में शनिवार को सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल यादव को जेल भेज दिया गया। गोपाल यादव कुछ अंतराल पर दो साल से कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में भर्ती होकर इलाज करा रहे थे।
सजायाफ्ता कैदी रामवृक्ष यादव के मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान विरोधियों की ओर से इलाज के बहाने मेडिकल कॉलेज में आराम फरमाने का आरोप लगाया गया था।
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हाईकोर्ट ने आरोप को गंभीरता से लिया और इस बाबत शासन से स्पष्टीकरण मांगा। हाईकोर्ट का रुख देख शासन समेत मेडिकल कॉलेज की नींद उड़ गई। जांच तो बाद में शुरू हुई लेकिन उसके पहले रामवृक्ष यादव को आनन-फानन में बस्ती जेल भेज दिया गया। इसके बाद एक-एक कर कैदियों को भेजा जाने लगा।
एक दिसंबर को रामायण यादव मंडलीय जेल भेजे गये जबकि राम मिलन यादव को बृहस्पतिवार की देर रात मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डिस्चार्ज कर दिया। कॉलेज और शासन की यह तेजी शनिवार को एक बार फिर देखने को मिली जब एक तरफ कॉलेज प्रशासन रामवृक्ष प्रकरण की जांच करने आ रहे डीजी कारागार और डीजी चिकित्सा शिक्षा की अगवानी में लगा था तो दूसरी तरफ गोपाल यादव को डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी।
दोपहर डेढ़ बजते-बजते गोपाल जेल भेज दिये गए। गोपाल के बाद अब कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में सजायाफ्ता अमर मणि त्रिपाठी उनकी पत्नी मधु मणि, मारकंडेय शाही और राजेश दुबे भर्ती हैं।
एंबुलेंस ने दे दिया जवाब
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज की ओर से गोपाल यादव का डिस्चार्ज कागजात तैयार हो जाने के बावजूद जेल प्रशासन उन्हें घंटे भर तक जेल नहीं ले जा सका। वजह बनी जेल की ओर से आई एंबुलेंस का जवाब देना। जब काफी प्रयास के बाद भी एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो कॉलेज की ओर से एंबुलेंस का इंतजाम किया गया।
अभी कॉलेज के एंबुलेंस में उन्हें बैठाने की तैयारी की जा रही थी कि एक ड्राइवर के प्रयास से जेल एंबुलेंस स्टार्ट हो गई। इस कवायद में गोपाल की जेल वापसी में एक घंटे की देरी हो गई।
मारकंडेय शाही वार्ड में बने रहेंगे
गोरखपुर। कूल्हे की खराबी के चलते कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में भर्ती सजायाफ्ता कैदी मारकंडेय शाही को जेल नहीं भेजा जाएगा। शनिवार की सुबह से ही उन्हें भी जेल भेजे जाने की चर्चा पर विराम तब लगा जब यह शासनादेश कॉलेज प्रशासन ने खोजकर निकाल लिया, जिसमें इलाज के लिए हायर सेंटर भेजे जाने तक कैदी मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती बने रहने का अधिकार है।
मारकंडेय शाही को इलाज के लिए कॉलेज प्रशासन ने डेढ़ साल पहले ही एम्स के लिए रेफर कर दिया था लेकिन एम्स प्रशासन ने उनके ऑपरेशन के लिए ढाई लाख रुपये का खर्च बताया। इससे मामला अभी तक अटका पड़ा है क्योंकि जेल प्रशासन के कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद आज तक ऑपरेशन की धनराशि शासन की ओर से स्वीकृत नहीं हो सकी है। उधर, राजेश दुबे का ऑपरेशन हुआ है। तबियत में सुधार आते ही उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
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