गोरखपुर। मंडलीय कारागार में रविवार की सुबह बंदियों के दो गुटों में मारपीट से जेल में अफरा-तफरी मच गई। बैरक नंबर दो में बंद दो दिग्गजों के साथ-साथ जेल में मौजूद उनके साथी भी भिड़ गए, जिससे माहौल गर्मा गया। जेल अधिकारियों ने सख्ती कर दोनों गुटों को अलग किया और बैरक बदलकर हालात संभाले।
लखनऊ जेल में बंद चंदन सिंह का भाई नंदन सिंह स्थानीय जेल में है। लूट के आरोप में बंद नंदन को कारागार के बैरक नंबर दो में रखा गया है। इसी बैरक में बहराइच निवासी पन्नेलाल भी है, जो हत्या के मामले में आरोपी है। कारागार के सूत्र बताते हैं कि बंदियों के बीच खुद को सूरमा साबित करने की दोनों की होड़ ही आपस में टकराने की वजह बन गई। बैरक में दो में मौजूद 200 बंदी भी इन दोनों के समर्थक के तौर पर दो हिस्सों में बंट गए हैं। बताते हैं कि सुबह किसी बात पर दोनों के गुर्गों में कहासुनी हुई और देखते-देखते मारपीट शुरू हुई, जिसने दो गुटों में भिड़ंत जैसी शक्ल ले ली। बंदियों की जंग की जानकारी पर अफसर दौड़े और बंदी रक्षकों की मदद से दोनों गुटों को न सिर्फ अलग किया, बल्कि बैरक भी बदल दीं।
नंदन और पन्नेलाल के बीच आपस में कहासुनी हो गई थी। दोनों को अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट करके तनातनी काबू कर ली है। हालात पर नजर रखी जा रही है।
- आरके सिंह, जेलर
कुछ दिन पहले हड़ताली तेवर में आए थे बंदी
गोरखपुर। जेल का माहौल ठीक रखने के लिए दबंग किस्म के कई बंदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित किए जाने के बाद भी जेल के भीतर का माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रहा है। कुछ दिन पहले बंदियों ने अमर मणि त्रिपाठी को जेल में लैपटॉप, फोन आदि की छूट देने का आरोप लगाते हुए खाना-पीना छोड़कर हड़ताली रुख अपना लिया था। आरोप को खारिज करने वाले जेल प्रशासन ने समझाकर बंदियों को शांत कर लिया था, जबकि बाद में इसे चंदन गुट के बंदियों की जेल प्रशासन को दबाव में लेने की साजिश बताया गया था। कुछ दिन की शांति के बाद रविवार को चंदन के भाई नंदन और पन्ने लाल गुट के बंदियों की भिड़ंत ने माहौल गर्मा दिया।