यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन मे कार्याशाला में मौजूद पुलिसकर्मी।
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आईजी पीएसी आशुतोष पांडेय ने शनिवार को पुलिसकर्मियों को उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की सम्मान की रक्षा की शपथ दिलाई और कहा कि महिला अपराध की घटना पर लगाम कसने के लिए कानून में हुए बदलाव की जानकारी हर पुलिसकर्मी को होना अनिवार्य है। वह गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में जेंडर सेंसटाइजेशन पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कुछ घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि थाने में आने पर महिला का केस तहरीर के आधार पर तुरंत दर्ज किया जाए। रेप और छेड़छाड़ के मामले में पीड़ित का 24 घंटे के भीतर कोर्ट में बयान कराया जाए। लापरवाही बरतने वाले लोगों के खिलाफ अफसर कार्रवाई सुनिश्चित कराए। उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से सभी को स्मार्ट बनने की सलाह दी और कहा कि नाबालिग के अपहरण की घटना को थानेदार, दरोगा, दीवान और सिपाही गंभीरता से लें। एसपी (सिटी) हेमराज मीणा ने कार्यशाला के उद्देश्य की जानकारी देने के साथ ही कानून में हुए बदलाव और इसे लेकर अधिकारियों के तरफ से जारी निर्देश की जानकारी दी।
इस मौके पर डीआईजी शिवसागर सिंह, एसएसपी रामलाल वर्मा, एसपी देवरिया प्रभाकर चौधरी, एसपी कुशीनगर, एसपी महराजगंज भारत यादव के अलावा इन जिलों से आए पुलिसकर्मी, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, छात्र मौजूद रहे।
24 घंटे में पीड़ित का कोर्ट में कराए बयान
अभियान अधिकारी बीडी मिश्रा ने बताया कि महिला अपराध को लेकर कानून में व्यापक रूप से बदलाव हुए हैं लेकिन पुलिस इसका अनुपालन नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश होने के बाद भी रेप और छेड़छाड़ की घटना की शिकार पीड़ित का बयान कोर्ट में 24 घंटे के भीतर नहीं कराया जाता। मेडिकल कराने के बहाने पीड़ित को बेवजह महिला थाना, आशा ज्योति केंद्र में रखा जाता है, जिससे मर्यादा को ठेस पहुंचती है।